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Kanpur News: सीमेंट की बोरी 20 रुपये महंगी, खाद्य पैकिंग उत्पाद में घटा माल

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कानपुर। तेल कंपनियों ने औद्योगिक डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं। उद्योगों का कच्चा माल पहले से ही महंगा है। आपूर्ति संकट बढ़ने के बीच लोगों पर महंगाई की मार पड़नी शुरू हो गई है। प्लास्टिक दाना महंगा होने से पैकेजिंग उत्पाद 25-30 प्रतिशत बढ़ गए हैं। इस कारण सीमेंट कंपनियों ने प्रति बोरी 20 रुपये तक की वृद्धि कर दी है। खाद्य पैकिंग उत्पाद में माल घटा दिया गया है। सेविंग ब्लेड, टंग क्लीनर, ताश, पान मसाला की कीमतें भी बढ़ गई हैं। कई पान मसाला कंपनियों ने पैकिंग में माल कम कर दिया है। आटा, शुगर और सीमेंट कंपनियों के सामने भी बोरियों का संकट आ गया है। किसानों के सामने भी बारदाना यानी बोरी की समस्या आ गई है। एक नई बोरी छह-सात रुपये महंगी हो गई है। पुरानी बोरी नहीं मिल रही है। इससे फसलों को सुरक्षित रखना चुनौती बन रहा है।
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अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध से कच्चा तेल महंगा होने, आयात वस्तुओं के दाम बढ़ने से और पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) की आपूर्ति में 20 प्रतिशत कटौती करने के आदेश से आटा मिलों पर दोहरा संकट आ गया है। इन मिलों ने एक शिफ्ट का काम बंद कर दिया है। एक तो मांग घटने से उत्पादन प्रभावित हो गया है, दूसरा तैयार माल को भरने के लिए अलग-अलग प्रकार की बोरी नहीं मिल रही हैं। कानपुर नगर और कानपुर देहात में मिलाकर 15 आटा मिलें हैं। इन मिलों में प्रतिदिन 1500-2000 टन आटा, मैदा, सूजी आदि तैयार किया जाता है। किसी आटा मिल की क्षमता 200 टन है तो किसी की 300 या 500 टन।
आटा फ्लोर मिल संचालक जितेंद्र सिंह ने बताया कि उत्पादन कम होने और उत्पादन लागत बढ़ने के कारण मिल एक शिफ्ट में चल रही है। आटा, मैदा और सूजी पैकिंग मैटीरियल के दाम बहुत अधिक हो गए हैं। कानपुर बारदाना व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन अग्रवाल ने बताया कि बोरी का संकट आटा मिल, शुगर मिलों के साथ सीमेंट कारोबार पर भी पड़ने लगा है। प्लास्टिक दाना महंगा होने से बारदाना उद्योग पर संकट बढ़ता ही जा रहा है। शहर से ही शुगर मिलों, आटा मिलों को बोरी की सप्लाई होती है। गेहूं और आलू भरने के लिए बाजार में नए और पुराना बारदाना की जबरदस्त कमी भी आ गई है। गेहूं-आलू को भरने के लिए बोरे नहीं मिल पा रहे हैं।
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बाॅयलर चलने वाली इकाइयों पर पड़ सकता औद्योगिक डीजल के बढ़े दाम का प्रभाव
कारोबारियों ने बताया कि शहर में औद्योगिक डीजल का इस्तेमाल सालों पहले नमकीन निर्माता इकाइयां भट्ठी जलाने में करती थीं। अब ये इकाइयां गैस आधारित हो गई हैं। इसके अलावा इनके रेट पहली बार नहीं बढ़ाए गए हैं। इकाइयों को मिलने वाले डीजल के आईटीसी का लाभ कारोबारी को दिया जाता है। कानपुर नगर, देहात की ऐसी इकाइयां जहां पर बाॅयलर चलते हैं। अब वहीं पर औद्योगिक डीजल की खपत होती है। शहर में इनकी संख्या 20-25 ही है।

बातचीत
बोरियों और कच्चे माल के संकट के चलते सीमेंट कंपनियाें ने सीमेंट के दाम प्रति बोरी 20 रुपये बढ़ा दी है। बाजार में 260-400 रुपये कीमत की सीमेंट की बोरियां मिलती हैं। अलग-अलग कंपनियां दाम बढ़ा रही हैं। शहर में हर महीने एक लाख टन बोरी सीमेंट की खपत है। -नवीन डरोलिया, प्रांतीय महामंत्री, उत्तर प्रदेश डीलर्स एसोसिएशन।

जो प्लास्टिक दाना फरवरी में 95 रुपये किलो था, अब 170 रुपये किलो में भी नहीं मिल रहा है। प्लास्टिक उत्पादन इकाइयों में 50 प्रतिशत ही उत्पादन रह गया है। कच्चा माल खत्म हो रहा है। जो बोरी पहले 13 रुपये प्रति पीस थी, उसके दाम 19-20 रुपये प्रति पीस हो गए हैं। -दीपक अग्रवाल, प्लास्टिक इकाई उद्यमी
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सेविंग ब्लेड, टंग क्लीनर, ताश, पान मसाला की कीमतें बढ़ गई हैं। पैक्ड फूड आइटम के दाम बढ़ाए गए हैं। कुछ कंपनियों ने पैकेट का भार कम कर दिया है। कंपनियां हर दिन रेट भी बदल रहीं हैं। जो ब्लेड का गत्ता 6900 रुपये में आता था, वह अब 7100 कर दिया गया है।
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रोशन लाल अरोड़ा, महामंत्री, नयागंज मर्चेंट एसोसिएशन।
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