यूनिवर्सिटी व साइबर कैफे वाले भी करते थे सहयोग
खेल की तह तक पहुंचने के लिए विवेचक ने कोर्ट के आदेश पर 22 अगस्त को शिव कुमार को दो दिन की कस्टडी रिमांड पर लिया। सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान शिव कुमार ने बताया कि जगदीश के गैंग से जुड़कर विश्वविद्यालय के गजट व ब्लैंक मार्कशीट उसे जगदीश पाल लाकर देता था। फिर वह गजट में संबंधित अधिकारी की हैंडराइटिंग में संशोधन करता था। इसके अलावा फर्जी मार्कशीट, डिग्री तैयार करने में उसका सहयोग यूनिवर्सिटी व साइबर कैफे वाले भी करते थे।
मार्कशीटों के खरीददारों को चिह्नित करने की कवायद शुरू
शिव कुमार ने कबूल कि यूनिवर्सिटी के पुराने अफसरों के हस्ताक्षर खुद फर्जी मार्कशीट व अंक तालिका में बनाता था। कल्याणपुर थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपी की निशानदेही पर यूनिवर्सिटी परिसर के पीछे जंगल से 10 गजट के पन्ने, 32 ब्लैंक मार्कशीट, दो पेन ड्राइव, एक मेमोरी कार्ड रीडर के साथ बरामद किया गया। थाना प्रभारी के मुताबिक रिमांड की अवधि खत्म होने पर शुक्रवार को आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल में दाखिल कर दिया गया। अब इन दस्तावेजों के जरिये पुलिस मार्कशीटों के खरीददारों को चिह्नित करने की कवायद में जुट गई है।