बीमाधारकों के साथ धोखाधड़ी के मामले में क्राइम ब्रांच की टीम ने एक और खुलासा किया है। पुलिस का दावा है जालसाज बीमाधारकों को चूना लगाने के बाद प्रयोग में लाया गया सिमकार्ड दोबारा सिम देने वाले एजेंटों को आधी कीमत पर बेच देते थे।
जिसके चलते इन सिम कार्ड की लोकेशन देश के अलग अलग स्थान पर मिलती है। इससे अपराधी पुलिस के पकड़ से दूर हो जाते हैं। बीमा धारकों का डाटा चुराकर प्रीमियम के नाम पर ठगने वाले गिरोह के छह लोगों को पुलिस गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
लखनऊ से सिम कार्ड बेचने वाले दो आरोपियों को भी दबोचा गया था। एडीसीपी क्राइम दीपक भूकर ने बताया कि पुराने समय में सिम कार्ड से अपराध करने के बाद आरोपी उसे तोड़ दिया करते थे जिससे पुलिस को उनकी लोकेशन न पता चल सके।
अब साइबर अपराधियों ने तरीका बदल दिया है। अब वह सिम कार्ड को नष्ट नहीं करते हैं बल्कि आधे दामों पर दोबारा उसी एजेंट को ही बेच देते हैं। ऐसे में जब पुलिस आईएमईआई नंबर सॉफ्टवेयर पर रन कराती है तो उसकी लोकेशन किसी और शहर में मिलने लगती है।