पिछले काफी दिनों से कानपुर से कार्गो हवाई सेवा शुरू करने की चल रही तैयारी को जल्द ही मूर्त रूप मिल सकता है। स्थानीय स्तर पर एक रिपोर्ट बनाकर एयरपोर्ट अथॉरिटी अहिरवां के निदेशक जमील खालिक ने सोमवार को भारतीय विमानपत्तन को भेज दी है। अनुमति मिलने के बाद यहां काम शुरू कर दिया जाएगा।
इसके बाद शहर की औद्योगिक इकाइयों से विदेश में आयात-निर्यात हो सकेगा। अभी यहां की औद्योगिक इकाइयों से होने वाले आयात-निर्यात का काम लखनऊ से संचालित कार्गो सेवा से होता है। अब अहिरवां में 70 के दशक में स्थापित सेंटर वेयर हाउस से कार्गो सेवा शुरू करने की योजना है।
सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही यह सेवा यहां से शुरू हो सकेगी। वर्ष 1975 केंद्र सरकार की तरफ से अहिरवां में सेंट्रल वेयर हाउस कारपोरेशन की स्थापना इस लिहाज से की गई थी कि कानपुर औद्योगिक नगरी के उत्पाद और बाहर से आने वाले कच्चे माल को लाया ले जाया सकेगा।
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वेयर हाउस परिसर से ही कार्गो सेवा का संचालन होगा। तब से लेकर अभी तक कुछ प्रयास हुए लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। सेंट्रल वेयर हाउस कारपोरेशन के प्रमुख एके मिश्रा और उनकी टीम के साथ करीब एक सप्ताह पहले एयरपोर्ट अथॉरिटी के निदेशक जमील खालिक की बैठक हुई थी। उसके बाद से ही इस योजना में तेेजी आई है।
कार्गो हवाई सेवा शुरू होने से उत्पादों को विदेश में भेजने के लिए की जाने वाली कानूनी प्रक्रिया भी शहर से ही पूरी की जा सकेगी। अभी यह काम उद्यमियों को मुंबई और चेन्नई जाकर करना पड़ता है।
अहिरवां एयरपोर्ट के पास स्थापित सेंट्रल वेयर हाउस कारपोरेशन से 1995 में कार्गो सेवा शुरू करने की योजना भी बन गई थी लेकिन सवारी विमानों का संचालन भी जब सफल नहीं हो पाया तो कार्गो सेवा की योजना भी बंद हो गई।
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सेंट्रल वेयर हाउस कारपोरेशन की इस जगह पर जब कार्गो सेवा के तहत काम नहीं हो पाया तब सरकार ने इसे कंटेनर डिपो के रूप में तब्दील कर दिया। इस बीच एक और कंटेनर डिपो पनकी में खुल जाने की वजह से वेयर हाउस में सन्नाटा छा गया।
अब यदि कार्गो सेवा शुरू होती है तो वेयर हाउस में अंदर और बाहर एक साथ करीब 500 कंटेनर रखे जा सकेंगे। इसके साथ इसी जगह पर उत्पादों के आयात-निर्यात की पूरी प्रक्रिया भी संभव हो पाएगी।
इससे उद्यमियों का समय और धन दोनों बचेगा। वेयर हाउस के अंदर करीब पांच हजार मैट्रिक टन और बाहर तीन हजार मैट्रिक टन उत्पाद सुरक्षित रखने का इंतजाम है।