इस संबंध में किए गए शोध के आंकड़ों को कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया के इंडिया हार्ट जर्नल में भी प्रकाशित किया गया है। कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट के चिकित्सा विज्ञानियों ने 555 रोगियों पर शोध किया। इनमें संक्रमण से मुक्त हुए मरीजों के अलावा ऐसे लोगों को भी शामिल किया गया था, जिन्हें कोरोना तो हुआ, लेकिन पता नहीं चला था।
थक्का बनने से पड़ रहा है हार्ट अटैक
जब इनकी नसों की जांच की गई, तो अंदरूनी सतह पर सूजन मिली। सूजन के कारण इनकी सतह चिकनी नहीं रह गई। इससे खून के बहाव की गति प्रभावित हो रही थी। शोध में पाया गया कि किसी वजह से अगर नसों में और सिकुड़न आएगी, तो खून का बहाव बाधित हो जाएगा। इससे थक्का बनता है, जो हार्ट अटैक की वजह होता है।
कार्डियोलॉजी के निदेशक प्रोफेसर विनय कृष्णा के निर्देशन में यह शोध किया गया। शोध के अगुवा डॉ. अवधेश शर्मा ने बताया कि कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया ने देशभर में इस संबंध में शोध कराया था। इसमें कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट भी शामिल था।
युवाओं को भी पड़ने लगा है अचानक अटैक
इंस्टीट्यूट में 350 व्यक्तियों पर शोध किया गया। पहले शोध जैसे नतीजे इसमें भी मिले थे। इन आंकड़ों को सोसाइटी ने अपने शोध में शामिल किया है। उन्होंने बताया कि नसों की सतहों में खुदरापन आने के बाद युवाओं को भी अचानक हार्ट अटैक पड़ने लगा है।
इसके पहले 60 साल और इससे अधिक आयु के रोगियों को ऐसी दिक्कत अधिक होती रही है। शोध में शामिल किए गए लोगों में 40 और 50 आयु वर्ग के लोगों में हार्ट अटैक के अधिक लक्षण मिले थे। कोरोना से पैदा हुई दिक्कत के अलावा धूम्रपान, प्रदूषण और मानसिक तनाव इन लक्षणों को और बढ़ा देता है।