कानपुर। महफूज अली और उसके साथियों ने बीमा और सरकारी योजनाओं का लालच देकर रिक्शा चालक, सब्जी विक्रेता, नौकर, ड्राइवर आदि को फर्म का मालिक बनाया। उनके आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेजों के सहारे करंट अकाउंट खोले गए। साथ में एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (एपीएमसी) के फर्जी सर्टिफिकेट लगाए। इससे एक करोड़ से अधिक की रकम आसानी से ट्रांसफर हो सके। यह जानकारी पुलिस को महफूज अली के खिलाफ एफआईआर लिखाने वाले वादियों ने दी है। जांच में भी फर्म और खाते फर्जी मिले हैं।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि ढाई साल में महफूज व उसके रिश्तेदारों के 12 बैंक के 68 खातों में 1600 करोड़ रुपये के लेनदेन की जानकारी हुई थी। बाद में इनकम टैक्स ने जांच कराई तो ट्रांजेक्शन 3200 करोड़ का निकला। बैंक खातों की संख्या भी 110 से अधिक पहुंच गई। हालांकि, अब तक आयकर विभाग ने खातों के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी है।
पुलिस की अलग-अलग टीमों ने 68 खातों की जांच की जिसमें 35 के आसपास खाते फर्म के नाम से खोले गए। यह फर्में रिक्शा चालक, लेबर, नौकर, चालक, सब्जी विक्रेता आदि के नाम से खोली गई थीं। आरती इंटरप्राइजेज, राजा इंटरप्राइजेज, अफीसा इंटरप्राइजेज, रवि इंटरप्राइजेज नाम की फर्जी फर्में शामिल हैं।
डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता के मुताबिक प्रारंभिक जांच में आरोपी कमीशन के चक्कर में बड़े कारोबारियों, टेनरी व स्लॉटर हाउस संचालकों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) और जीएसटी का लाभ पहुंचा रहे थे। इसके लिए बोगस और फर्जी फर्में तैयार कराई गईं। इसके लिए पांच से छह युवकों को रखा गया था। यह रुपये खाते में भेजने और उनको निकलवाने का कार्य कर रहे थे। पुलिस उनके बारे में भी जानकारी जुटा रही है। इस कार्य में तीन से पांच फीसदी का कमीशन मिलता था। खातों में एक दिन में चार से छह करोड़ रुपये तक का ट्रांजेक्शन मिला है।
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