कानपुर देहात। जिले के परिवहन निगम ने महिला सशक्तिकरण के लिए सार्थक पहल की है। निगम के क्षेत्रीय कार्यालय पर रोजगार मेला आयोजित कर महिला कर्मियों की भर्ती की है। इसमें माती डिपो में तीन महिला परिचालक को चयनित कर तैनाती मिली है। जबकि एक मृतक आश्रित में नियुक्त हुईं हैं। अब यह बस का टिकट काटकर जिंदगी के सफर में आत्मनिर्भर बन रही हैं।
यह महिला परिचालक बेहिचक यात्रियों को बैठाने के साथ ही उनकी सुविधा का भी ख्याल रख रही हैं। वहीं रोडवेज की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इस भर्ती प्रक्रिया में चयनित महिलाओं को उनका गृह जनपद दिया गया है। इस बदलाव ने महिलाओं के लिए रोजगार से आगे बढ़कर भरोसे और समानता की राह खोली है। वह सड़क पर पूरी मजबूती से यात्री सुरक्षा का ध्यान रखते हुए संचालन कर रही हैं। एआरएम मो. अशफाक ने बताया कि महिला परिचालक पुरुषों की अपेक्षा बेहतर तरीके से कार्य कर रही हैं। उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है। हर रूट पर बसों को लेकर जा रही हैं। अभी भी महिला परिचालक की तलाश जारी है। इन महिला परिचालकों ने लोगों की सोज को बदल दिया है।
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आत्मनिर्भर बन पिता का सहयोग करने का मिला मौका
पुलिस की तैयारी करने के साथ परिचालक के पद पर कार्य कर रही हूं। पिता हरिनाम सिंह भदौरिया किसान हैं, लेकिन कई बार फसल बर्बाद होने से घर में समस्या आ जाती है। परिचालक की नौकरी कर उत्साहित हूं, क्योंकि इससे पिता की सहायता करने का मौका मिला है। जिससे परिवार का खर्च चलाने में सहयोग हो रहा है। - शिल्पी, नवीपुर।
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आत्मनिर्भर बनकर सिविल सर्विस की कर रही तैयारी
परिचालक के रूप में कार्य करना अच्छा लग रहा है। बस में महिला परिचालक होने से सफर करने वाली महिलाएं सुरक्षित महसूस करती हैं। पिता अशोक कुमार गुप्ता कानपुर में व्यापार करते हैं। स्वयं आत्मनिर्भर बनकर अपनी पढ़ाई को आगे जारी रख सिविल सर्विस की तैयारी कर रही हूं। विभाग ने महिला सुरक्षा को देखते हुए माती-लखनऊ रूट की जिम्मेदारी सौंपी है। - नैंसी गुप्ता, बर्रा कानपुर
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बेटे की पढ़ाई में मिला सहयोग, हो रहा परिवार का भरण पोषण
पति की मृत्यु के बाद परिवार बिखर सा गया था, लेकिन मृतक आश्रित के रूप में परिचालक के पद पर नौकरी मिलने से काफी सहयोग मिला। अब सास की सेवा के साथ बेटे की पढ़ाई हो पा रही है। माती से लखनऊ रूट पर चलती हूं। मार्ग में यात्री व विभाग के अधिकारी हमेशा उत्साह बढ़ाते हैं। - पूनम, अकबरपुर
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पति के साथ कंधे से कंधा मिला तय कर रही जिंदगी का सफर
पति दिग्विजय सिंह ई-रिक्शा चलाने का काम करते हैं। पहले परिवार का खर्च चलाने में समस्या होती थी। परिचालक की नौकरी मिलने से परिवार में सास, ससुर व बेटे सभी उत्साहित हो गए। अब पति के साथ मिलकर घर के खर्च चला रही हूं। दोनों मिलकर जिंदगी के सफर में चल रहे हैं और बेटे का भविष्य संवार रहे हैं। - लक्ष्मी, बाढ़ापुर।