बजट में आत्मनिर्भर भारत को ही फोकस में रखा गया है। मुख्य फोकस छह सेक्टर (इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि, महिला, स्वास्थ्य, रेलवे व अन्य) पर है। इन सेक्टरों में ज्यादा से ज्यादा निवेश होगा। इन सेक्टरों पर फोकस रखने से इंडस्ट्री में मांग बढ़ेगी। आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने के लिए अर्थव्यवस्था का विस्तार जरूरी है।
यह बात मर्चेंट चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मुकुल टंडन ने कही। उन्होंने कहा कि जब वस्तुओं की डिमांड बढ़ेगी तो उद्योगों का विस्तार होगा और नए रोजगार भी पैदा होंगे। हालांकि इस बजट में आम आदमी को कोई राहत नहीं दी गई है। हां, इतना जरूर है कि कोई नया टैक्स नहीं लगाया गया है। पेट्रोल और डीजल पर लगे सेस से पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर कोई विशेष फर्क नहीं पड़ेगा।
मध्य वर्ग के लिए कुछ नहीं
यह आम बजट न होकर चुनावी बजट है। कोरोना काल में सबसे ज्यादा नुकसान उद्योगों और मध्य वर्ग के लोगों का हुआ था लेकिन इनको बजट में कुछ नहीं दिया गया। सरकार ने एजेंडा रूपी बजट तैयार किया है। यह आत्मनिर्भर भारत ध्वस्तीकरण का बजट है। उद्यमियों को इस बजट से कोई राहत नहीं मिलने वाली है।
सिद्धार्थ काशीवर, मर्चेंट चैंबर ट्रेड कमेटी, उपाध्यक्ष
बाजार में पूंजी पहुंचने से उद्योगों को मिलेगा लाभ
यह बजट मेक इन इंडिया को देखते हुए बनाया गया है। देश में उद्योग को बढ़ावा मिले, इसलिए कस्टम ड्यूटी को बढ़ाया गया। उेसे में देश में बाहर से आने वाली चीजें महंगी होंगी। इसमें उद्यमियों के लिए ज्यादा कोई राहत नहीं दी गई। फिर भी बाजार में पूंजी पहुंचने से इंडस्ट्रियों को लाभ मिलेगा।
संतोष अग्रवाल, अध्यक्ष, कानपुर कम्युनिटी एक्सचेंज
एमएसएमई को नहीं मिली राहत
बजट से उद्यमी और मध्य वर्ग के लोग निराश हैं। देश में लग रही कस्टम ड्यूटी को बढ़ाया गया है जिससे देश में बनने वाला माल बाहर महंगे दाम पर बिक सकेगा। इससे देश की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। एमएसएमई (लघु एवं सूक्ष्म उद्योग) के लिए 15 हजार 700 करोड़ की जो धनराशि दी गई है वो ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। उद्योगों को कोई फायदा नहीं है। हमारी मांग थी कि जिस उद्योग में 50 से कम कर्मचारी हैं तो उन्हे पीएफ से मुक्त रखा जाए लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया।
सुशील शर्मा, चेयरमैन, इंडस्ट्री कमेटी मर्चेंट चैंबर
करमुक्त सीमा में कोई कटौती नहीं
लोगों को सरकार से उम्मीद की थी इस बजट में कुछ ऐसा करेगी जिससे कोरोना के कारण बेपटरी हुई उनकी आर्थिक व्यवस्था पटरी पर आ सके लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया। करमुक्त सीमा में कोई कटौती नहीं की गई। वहीं आयकर ट्रिब्यूनल को न्यायिक प्रक्रिया में लाने से किसी भी केस में निर्णय लेने में बहुत दिक्कत होगी। बजट में केवल पेंशनर्स को लाभ दिया गया है, बाकी किसी को नहीं।
संतोष गुप्ता, वरिष्ठ कर सलाहकार