सपा के पारिवारिक विवाद और भाजपा की दलित मतदाताओं में सक्रियता को देखते हुए बसपा मुस्लिम और ब्राह्मण मतदाताओं में पैठ बनाने में जुट गई है। इसकी शुरुआत कानपुर से की जा रही है। यहीं से पूरे बुंदेलखंड पर फोकस किया जा रहा है।
मुस्लिम अभियान की जिम्मेदारी जोनल कोआर्डिनेटर और पूर्व एमएलसी नौशाद अली और ब्राह्मणों को एकजुट करने का काम राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र मिश्र को दिया गया है। ‘ब्राह्मण-अल्पसंख्यक मतदाता’ जोड़ो अभियान की शुरुआत रविवार से हो गई है।
शहर के डिप्टी पड़ाव के एक गेस्ट हाउस में कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के मुस्लिम बसपा पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गई। इसे पूरी तरह गोपनीय रखा गया। बैठक में रणनीति बनाई गई है कि सभी 52 विधानसभा क्षेत्रों में रहने वाले मुस्लिम परिवारों के बीच जाकर यह बताना है कि अब उनके पास बसपा के अलावा कोई विकल्प नहीं है। क्योंकि सपा परिवारवाद में फंसकर खत्म हो रही है और कांग्रेस की हालत जगजाहिर है। ऐसे में भाजपा को रोकने के लिए बसपा का साथ देना जरूरी है।
इधर ब्राह्मण मतदाताओं के बीच पार्टी को मजबूती से खड़ा करने के लिए सतीश चंद्र मिश्र के जरिए जिस तरह से 2007 में बढ़त मिली थी, उसी को दोहराने की तैयारी हो रही है। 17 अक्तूबर को घाटमपुर विधानसभा क्षेत्र में सतीश चंद्र मिश्र की कानपुर मंडल की दूसरी बैठक होने जा रही है। सतीश की बैठकों में आसपास के सभी विधानसभाओं से ब्राह्मणों को लाने की जिम्मेदारी बसपाइयों को दी गई है। हर विधानसभा से कम से कम एक हजार ब्राह्मण लाने का लक्ष्य है। इसके पीछे दिखाना यह है कि बसपा के साथ ब्राह्मण तेजी से जुट रहे हैं। इस बीच अल्पसंख्यकों के लिए जो टीम बनाई गई है, उसमें तहसीन सिद्दीकी, मुमताज जैसे कई नेता शामिल हैं।
कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 13 लाख है, जबकि ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या इसके दोगुने से भी ज्यादा है। बसपा का इन दोनों जातियों को अपनी ओर खींचने का जो गणित है, उसमें कहा जा रहा है कि बसपा को छोड़कर इन दोनों जातियों की चर्चा और कोई पार्टी नहीं कर रही है। बसपा को भरोसा है कि वह अपने इस इरादे में सफल भी होगी।