कानपुर। बहन की हत्या पर भाई ने बहनोई के खिलाफ रिपोर्ट तो दर्ज करा दी लेकिन कोर्ट में बयान से मुकर गया। मृतका के अन्य घरवाले भी बहनोई को बचाने में पक्षद्रोही हो गए लेकिन कोर्ट ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डॉक्टर, विवेचक व अन्य गवाहों के आधार पर पति को पत्नी की हत्या का दोषी मानकर उम्रकैद की सजा सुना दी।
दादानगर के नौरैयाखेड़ा निवासी मंजू देवी की शादी नौबस्ता के राजीवनगर निवासी सुनील कुशवाहा से 25 अगस्त 2012 को हुई थी। नाै अगस्त 2019 को मंजू के भाई संतोष कुमार को मंजू की मौत की खबर मिली। संतोष ससुराल पहुंचा और नौबस्ता थाने में पति सुनील, ससुर चंद्रपाल और चचिया ससुर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि सुनील व्यापार के लिए दो लाख रुपये मायके से लाने के लिए मंजू पर दबाव बना रहा था। मांग पूरी न होने पर सुनील ने गला दबाकर मंजू की हत्या कर दी।
एडीजीसी ने बताया कि महिला के पति सुनील और ससुर चंद्रपाल के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट भेजी गई थी। अभियोजन की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराने वाले मृतका के भाई संतोष कुमार, मां शांति देवी, दूसरे भाई सूरज कुशवाहा, भाभी वंदना कुशवाहा कोर्ट में बयान से मुकर गए। मंजू को प्रताड़ित करने या उसकी हत्या करने की बात से इन्कार कर दिया लेकिन पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने कोर्ट में गवाही के दौरान कहा था कि गर्दन पर जो चोटें थीं वह फांसी का फंदा लगाने से नहीं आतीं गर्दन दबाई गई थी। शरीर पर सभी चोटें मौत से पहले की थीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डॉक्टर, विवेचक व अन्य गवाहों के बयानों के आधार पर कोर्ट ने माना कि पति ने ही पत्नी की हत्या की है। इस पर पति सुनील को उम्रकैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई जबकि दहेज प्रताड़ना का आरोप साबित न होने पर कोर्ट ने ससुर को दोषमुक्त करार दे दिया।