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कोरोना के बाद दोबारा शुरू की गई शताब्दी में पानी का भी पैसा, तेजस में नाश्ता-खाना फ्री

Sun, 28 Feb 2021 03:52 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा सुहेल खान, अमर उजाला, कानपुर
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तेजस एक्सप्रेस - फोटो : अमर उजाला
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लॉकडाउन के बाद लखनऊ-नई दिल्ली शताब्दी, कानपुर-नई दिल्ली रिवर्स शताब्दी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों का रेलवे ने संचालन तो शुरू कर दिया है, लेकिन यात्रियों को मिलने वाली सुविधाएं खत्म कर दी हैं। मसलन यात्रियों को मिलने वाली मुफ्त पानी की बोतल, चाय, नाश्ता बंद कर दिया है। किराया भी नहीं घटाया है। एक बोतल पानी भी 15 रुपये में खरीदकर पीना पड़ रहा है। वहीं, आईआरसीटीसी द्वारा संचालित कारपोरेट ट्रेन लखनऊ-नई दिल्ली तेजस एक्सप्रेस में पानी, चाय-काफी, नाश्ता, खाना फ्री है। कोरोना किट भी दी जा रही है। अलग से कोई चार्ज यात्रियों को नहीं देना पड़ता है। किराया भी कम किया गया है।
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पहले शताब्दी में फ्री थी खानपान की सुविधा
रेलवे की वीआईपी ट्रेन शताब्दी एक्सप्रेस में यात्रियों को लॉकडाउन के पहले सीट पर बैठते ही पानी की बोतल मिलती थी। चाय, नींबू पानी के साथ सुबह नाश्ते में वेज में आलू का पराठा, कटलेट और नॉनवेज में आमलेट या उबला अंडा या भुर्जी मिलती थी। ब्रेड जैम, सॉस भी किराये में ही शामिल होता था। शाम को भी पानी की बोतल, चाय, नमकीन पैकेट, समोसा या सैंडविच यात्रियों को परोसा जाता था। अब इन ट्रेनों में पकाकर खाना बेचने की अनुमति नहीं है। पैक्ड या रेडी टू ईट के नाम पर जो नाश्ता-चाय मिलता है, वह खरीदना पड़ता है। 

तेजस में खान-पान की फ्री सुविधाएं बढ़ीं 
रेलवे ने तेजस में इस ट्रेन में पका हुआ खाना (कुक्ड फूड) परोसने की अनुमति दे दी है। इसमें सुबह सीट पर बैठते ही कोरोना किट, पानी की बोतल मिलती है। इसके बाद हर कोच में लगी आरओ वॉटर मशीन से पानी ले सकते हैं। चाय, कॉफी जितनी चाहें, उतनी बार फ्री। नाश्ते में आलू-पराठा, उपमा-बड़ा, पोहा, वेज कटलेट और नॉनवेज में ऑमलेट वेज, एक कटलेट या भुर्जी, उबले अंडे के अलावा ड्रिंक्स में पैक्ड जूस या लस्सी, दही मिलता है।
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शताब्दी एक्सप्रेस - फोटो : amar ujala
इसके बाद लाइट रिफ्रेशमेंट के नाम पर चाय के साथ बिस्कुट या समोसा फ्री। रात में फुल डिनर है। वेज में सूप, पनीर की सब्जी, सूखी सब्जी, मिक्स वेज या भिंडी व पराठे, चपाती के अलावा प्लेन राइस, पुलाव या जीरा राइस में एक मिलता है। दाल-पराठा चावल का भी विकल्प है। नॉनवेज में चिकन है। दही के अलावा मीठे में गुलाब जामुन या रसगुल्ला फ्री है। इसका फायदा भी ट्रेन को मिला है। यात्रियों की संख्या बढ़ी है। 

शताब्दी का किराया बढ़ा, तेजस का सफर सस्ता
तेजस एक्सप्रेस ने यात्रियों को लुभाने के लिए जहां 40 प्रतिशत तक बुकिंग होने पर बेस फेयर न बढ़ाने का फैसला लिया है। वहीं शताब्दी एक्सप्रेस में फ्री खाना-पीना बंद करने के बाद भी किराया नहीं घटाया और बेस किराया बढ़ा देने से यात्रियों को दिल्ली जाने और वहां से आने में उतना ही किराया देना पड़ेगा। तेजस एक्सप्रेस में कानपुर से दिल्ली जाने में चेयरकार का बेस किराया शुक्रवार और सोमवार को 780 रुपये और शनिवार, रविवार को 850 रुपये है। स्वर्ण शताब्दी का किराया 965, रिवर्स शताब्दी का 715 रुपये है।

कोरोना के नाम पर ये सुविधाएं भी खत्म
कोरोना के बाद ट्रेनों का संचालन रेलवे ने कोविड स्पेशल बनाकर करना शुरू किया। इसमें कई छूट खत्म कर दी गईं। मसलन रिजर्वेशन कराने पर सीनियर सिटीजन, दिव्यांग जनों और विद्यार्थियों को मिलने वाली छूट खत्म हो गई। पिछले तीन-चार दिनों में जो पैसेंजर ट्रेनें शुरू की गई हैं, उनका किराया मेल-एक्सप्रेस जैसा है। कानपुर से लखनऊ के बीच चलने वाली मेमू का लखनऊ का किराया पहले 20 रुपये था, अब जनरल टिकट 45 रुपये का है।

क्योंकि कारपोरेट सेक्टर की ट्रेन है तेजस
शताब्दी एक्सप्रेस समेत सभी ट्रेनों पर भारतीय रेलवे का नियंत्रण है। जबकि लखनऊ-नई दिल्ली तेजस एक्सप्रेस एक कारपोरेट सेक्टर यानी निजी सेक्टर की ट्रेन है। इसे आईआरसीटीसी संचालित कर रहा है। इसकी सुविधाएं, किराया समेत सभी चीजें आईआरसीटीसी ही निर्धारित करता है। रेलवे ने कई अन्य रेल रूटों पर भी 2023 में प्राइवेट सेक्टर की ट्रेनों को चलाने की फैसला लिया है। इस संबंध में नॉर्थ सेंट्रल रेलवे इंप्लाइज संघ के मंडल अध्यक्ष मान सिंह का कहना है कि प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए रेलवे यह सब फैसले कर रही है। 

शताब्दी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों में पानी की बोतल न मिलने जैसी सुविधाओं की जानकारी के बारे में वाणिज्यिक विभाग से पूछा जाएगा। अभी कोविड स्पेशल ट्रेनें चल रही हैं।
अजीत कुमार सिंह, सीपीआरओ, उत्तर मध्य रेलवे

तेजस एक्सप्रेस में कुक्ड फूड यात्रियों को परोसने की अनुमति है। 40 प्रतिशत तक सीटों की बुकिंग में बेस किराये में कोई फ्लैक्सी फेयर लागू नहीं है। किराये में खान-पान की सभी सुविधाएं पहले की तरह फ्री हैं।
अनिल गुप्त, क्षेत्रीय प्रबंधक, आईआरसीटीसी

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