भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की बोर्ड ट्रॉफी (अंडर-16,19,23 व रणजी) खेलने वाले प्रत्येक खिलाड़ी को अब जीएसटी नंबर (रजिस्ट्रेशन) लेना होगा। नंबर न लेने वाले खिलाड़ी का भुगतान बीसीसीआई नहीं करेगा। इससे हर साल बीसीसीआई को करीब 3.81 करोड़ रुपये अतिरिक्त भुगतान जीएसटी के नाम पर करना होगा।
डेमो पिक
अभी तक बोर्ड ट्रॉफी खेलने वाले खिलाड़ियों में सिर्फ सीनियर खिलाड़ियों को 15 फीसदी सर्विस टैक्स देना पड़ता था। इस साल जीएसटी अनिवार्य होने पर अब खिलाड़ियों को भी इस दायरे में शामिल किया गया है। बीसीसीआई ने वर्ष 2017-18 खेल सत्र के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें सीनियर खिलाड़ियों (रणजी) के अलावा अंडर-16,19 व 23 टीमों के खिलाड़ियों को भी जीएसटी में शामिल किया गया है।
उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष रियासत अली ने बताया कि नई गाइडलाइन के मुताबिक प्रत्येक आयु वर्ग में बीसीसीआई में रजिस्ट्रेशन कराने वाले 30 खिलाड़ियों को जीएसटी नंबर लेना होगा। जिन खिलाड़ियों के पास नंबर नहीं होगा उन्हें बीसीसीआई भुगतान नहीं करेगा। खिलाड़ी की मैच फीस में कोई कटौती नहीं होगी। जो 18 फीसदी जीएसटी लगेगा उसे बीसीसीआई मैच फीस में जोड़कर भुगतान करेगा। इसके बाद उस खिलाड़ी को 18 फीसदी जीएसटी में जमा करना होगा।
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यूपी अंडर-16 टीम में खेलने वाले एक खिलाड़ी को बीसीसीआई एक मैच की 1500 रुपये फीस देती है। इस फीस का 18 फीसदी होगा 270 रुपये। अब बीसीसीआई 1770 रुपये का भुगतान खिलाड़ी को करेगा। इसमें 270 रुपये खिलाड़ी को जीएसटी में जमा करना होगा।
3.81 करोड़ रुपये का भुगतान अधिक होगा
अभी तक बीसीसीआई हर साल यूपीसीए की ओर से बोर्ड ट्रॉफी (अंडर-16,19,23 व रणजी) खेलने वाले खिलाड़ियों को 70 लाख रुपये का भुगतान करता है। जीएसटी लगने पर अब यह भुगतान बढ़ जाएगा। इसमें 12.60 लाख रुपये जोड़कर बीसीसीआई अब 82.60 लाख रुपये का भुगतान करेगा। अब 30 राज्यों के हिसाब से यह भुगतान करीब 3.81 करोड़ रुपये हो जाएगा। इस कारण हर साल बीसीसीआई को अब करीब 3.81 करोड़ रुपये का भुगतान जीएसटी का करना होगा।