कानपुर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के ब्लड बैंक पदाधिकारी और ड्रग विभाग के अधिकारी एक कार्रवाई को लेकर आमने-सामने हैं। ड्रग विभाग ने जांच में खामियां मिलने का हवाला देते हुए ब्लड बैंक को बंद करने के निर्देश दिए थे। वहीं, आईएमए प्रबंधन का दावा है कि उनकी ओर से कोई कमी नहीं है और उन्होंने ब्लड बैंक बंद नहीं किया है।
ड्रग विभाग के अनुसार, पूरे प्रदेश में ब्लड बैंकों की स्थिति जांचने के लिए मार्च में लखनऊ से टीम आई थी। निरीक्षण के दौरान कई तकनीकी और मानक संबंधी खामियां पाई गईं। इसमें रक्त की जांच और उसकी रिपोर्ट से संबंधित सही दस्तावेज नहीं मिले थे। रक्त की सुरक्षा और गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता था। इस कारण आईएमए समेत मायांजलि, पुष्पांजलि, वाडा और स्वास्तिक ब्लड बैंक को 15 दिन के लिए बंद करने के निर्देश दिए गए थे। कमियों को दूर करने के बाद रिपोर्ट लखनऊ भेजी जानी थी। दोबारा संचालन की अनुमति मिलने पर ही काम शुरू होना था।
आईएमए के ब्लड बैंक प्रभारी शशिकांत मिश्रा ने बताया कि उनके ब्लड बैंक में कोई खास कमी नहीं थी। फायर सेफ्टी संबंधी काम चल रहा था, इसलिए बैंक दो दिन के लिए बंद रहा। दो दिन के बाद से ब्लड बैंक लगातार चल रहा है। जरूरतमंदों को रक्त देने सहित रक्तदान भी कराया जा रहा है। शशिकांत मिश्रा ने 15 दिन बंद करने की गलत सूचना पर प्रेस वार्ता करने की बात कही। वहीं, खाद्य एवं औषधि विभाग के सहायक आयुक्त अतुल उपाध्याय ने बताया कि आईएमए सहित पांच ब्लड बैंकों को 15 दिन के लिए बंद करने के निर्देश दिए गए थे। अभी तक इनके खुलने से संबंधित कोई नया आदेश नहीं मिला है। आदेश मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। कहा कि चारों ब्लड बैंक अभी तक बंद हैं।