1952 में अस्तित्व में आई विधानसभा सीट महोबा में कांग्रेस का दबदबा रहा है। अब तक 16 बार हुए विधानसभा चुनाव में छह बार कांग्रेस का इस सीट पर कब्जा रहा है। जबकि भाजपा को सिर्फ एक बार इस सीट पर जीत का मजा मिला है। 1996 से इस सीट पर लगातार सपा और बसपा का दो-दो बार कब्जा रहा है। 1980 में बाबूलाल तिवारी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में महोबा विधानसभा से जीत दर्ज की थी।
1989 के बाद से कांग्रेस इस सीट पर जीत के लिए जद्दोजहद कर रही है।
अमित शाह (फाइल फोटो)
इसके बाद दो बार कांग्रेस ने चुनाव लगातार जीता। 1989 के बाद से कांग्रेस इस सीट पर जीत के लिए जद्दोजहद कर रही है। वहीं 1991 में भाजपा से छोटेलाल मिश्रा ने जीत दर्ज की थी। लेकिन 1993 के चुनाव में वह जनतादल प्रत्याशी अरिमर्दन सिंह से हार गए थे। 23 साल से भाजपा इस सीट पर जीत दर्ज करने का इंतजार कर रही है। इस सीट से 1952 में मनीलाल गुरुदेव पहली बार जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। किसी भी जनप्रतिनिधि ने विकास की सुध नहीं ली। शहर में झूलते तार और फुटपाथ पर जिंदगी गुजार रहे गरीबों को है आशियाने की दरकार।
महोबा विधानसभा क्षेत्र का ब्यौरा
डेमो
महोबा विधानसभा क्षेत्र का ब्यौरा
कुल मतदाता 298609
पुरुष 163870
महिला 134735
अन्य 04
जनसंख्या 409600
वार्ड 25
मतदेय स्थल 323
2012 में थे मैदान में
केशव प्रसाद मौर्य (फाइल फोटो)
2012 में थे मैदान में
पार्टी प्रत्याशी मत
कांग्रेस अरिमर्दन सिंह 40684
भाजपा बादशाह सिंह 30350
बसपा राजनारायण बुधौलिया 43963
सपा सिद्धगोपाल साहू 43609
अब तक के विधायक
डेमो
अब तक के विधायक
वर्ष सदस्य पार्टी
1952 मन्नीलाल गुरुदेव कांग्रेस
1957 बाबू बृजगोपाल कांग्रेस
1962 मदनपाल सिंह प्रजा सोसलिस्ट पार्टी
1667 जोरावर जनसंघ
1969 मोहनलाल कांग्रेस
1974 चंद्र नारायण कांग्रेस
1977 उदित नारायाण शर्मा जनता पार्टी
1980 बाबूलाल तिवारी निर्दलीय
1985 बाबूलाल तिवारी कांग्रेस
1989 बाबूलाल तिवारी कांग्रेस
1991 छोटेलाल मिश्रा भाजपा
1993 अरिमर्दन सिंह जनतादल
1996 अरिमर्दन सिंह सपा
2002 सिद्धगोपाल साहू सपा
2007 राकेश गोस्वामी बसपा
2012 राजनारायण बुधौलिया बसपा
परिसीमन में क्या घटा क्या जुड़ा
प्रदेश कार्यालय भाजपा उत्तर प्रदेश
परिसीमन में क्या घटा क्या जुड़ा
2008 के बाद हुए परिसीमन के बाद महोबा विधानसभा के अजनर, कैथोरा, लमौरा, इंद्रहटा, हसला, गुढ़ा, अमानपुरा, बेलाताल, बछेछरकला, आनंदपुरा, बडे़रा, चमरुआ, मवइया, बुधौरा, महेबा, बुधवारा, रजपुरा, स्यावन, फसानाबाद, टिकरिया, खिरिया, बिजौरी सहित दो दर्जन गांव महोबा विधानसभा से कटकर विधानसभा चरखारी में जोड़ दिए गए। इसी तरह खरेला, बसौठ, पुन्निया, धवारी, बरदा, टिकरी, बिंदावर, पहरेथा, अतरौली, सहित डेढ़ दर्जन से ज्यादा गांव मौदहा विधानसभा से कटकर महोबा विधानसभा में जुड़ गए। 2012 में हुए विधानसभा चुनाव नए परिसीमन के हिसाब से कराए गए थे।
टिकट के जद्दोजहद में सभी दलों के दावेदार
डेमो
टिकट के जद्दोजहद में सभी दलों के दावेदार
नए परिसीमन के बाद महोबा विधानसभा सीट ठाकुर बाहुल सीट मानी जाने लगी है। हालांकि पिछड़ी जाति और अनुसूचित जाति के मतदाताओं की भी ठीकठाक स्थिति है। मुस्लिम मतदाता भी इस सीट पर निर्णायक स्थिति में रहता है। पिछले दिनों राहुल गांधी भी यहां पर घाट सभा लेकर आ चुके है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी रैली हो चुकी है। सपा की साइकिल यात्रा भी निकाली गई। तो भाजपा ने परिवर्तन यात्रा निकालकर भाजपा का गुणगान किया। लेकिन इस दफा के चुनाव में बसपा सुप्रीमों ने सिटिंग एमएलए का टिकट काटकर नए प्रत्याशी पर भरोसा जताया है।
विधानसभा क्षेत्र की पहचान
डेमो
विधानसभा क्षेत्र की पहचान
बड़ी चंद्रिका देवी मंदिर, सूर्य मंदिर, शिवतांडव, खखरामठ, ऐतिहासिक चंदेलकालीन सरोवर, आल्हा ऊदल की प्रतिमाएं और औद्योगिक क्षेत्र में देश विदेश में मशहूर महोबा का पान यहां की पहचान बने हुए है।
सपा बसपा की रही टक्कर
वर्ष 1993 के बाद से महोबा विधानसभा सीट में सपा बसपा की टक्कर होती रही। यही वजह है कि इस सीट पर 1993 के बाद से दो बार समाजवादी पार्टी तो दो बार बहुजन समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की। जबकि इससे पहले कांग्रेस का बेालबाला रहा। अन्य दल एक एक बार ही चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे।
जातीय समीकरण
ठाकुर बाहुल सीट, ब्रहृाम्ण, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति वर्ग, मुस्लिम आदि शामिल है।