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भाजपा ने स्वतंत्रदेव को बनाया प्रदेश अध्यक्ष, पीएम मोदी के करीबी को इस वजह से तो नहीं सौंपी गई कमान

Wed, 17 Jul 2019 05:59 PM IST
शिखा पांडेय पंकज प्रसून, अमर उजाला, कानपुर
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स्वतंत्रदेव सिंह - फोटो : सोशल मीडिया
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भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वतंत्रदेव सिंह को पार्टी ने पिछड़ी जातियों को एकजुट करने के लिए कमान सौंपी है। पार्टी 2017 की रणनीति को नई कसौटी पर कसकर 2022 के विधानसभा चुनाव को फतह करने की तैयारी में है।
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जिस तरह से पिछले विधानसभा चुनाव में पिछड़ी जाति से आने वाले केशव प्रसाद मौर्य को पार्टी की कमान दी गई थी। जिससे जोरदार सफलता हासिल हुई थी। इस बार फिर से पार्टी ने स्वतंत्रदेव सिंह पटेल के रूप में पिछड़ी जाति के नेता को पार्टी की कमान देकर सपा को घेरने की तैयारी की है।
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स्वतंत्रदेव भाजपा संगठन में नया चेहरा नहीं हैं। इससे पहले भी उन्हें प्रदेश की कमान देने की बात सामने आ चुकी है। 2014 का लोकसभा चुनाव हो या फिर 2017 का विधानसभा चुनाव संगठन में उनकी सक्रियता काफी रही है।

उनके प्रदेश अध्यक्ष के रूप में आने से मौर्य, कुशवाहा, शाक्य, कुर्मी, पाल जैसी पिछड़ी जातियां, जो बड़ी संख्या में हैं, उन्हें भाजपा की ओर मोड़ने में आसानी होगी। प्रदेश के कुल मतदाताओं में पिछड़ी जाति के मतदाताओं की संख्या करीब 50 प्रतिशत के आसपास है। इतने बड़े वोट बैंक पर सपा अक्सर अपना अधिकार बताती रहती है। ऐसे में स्वतंत्रदेव के आने से सपा को भी झटका लगा है।
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कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में अच्छी पकड़
नवनियुक्त भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह की कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में अच्छी पकड़ है। बुंदेलखंड के उरई से उन्होंने अपनी राजनीति को धार दी है। पूरे क्षेत्र में वह पिछड़ी जातियों के बड़े नेता के रूप में जाने जाते हैं।

भाजपा के साथ ही संघ से भी उनका अच्छा रिश्ता है। स्वतंत्र देव मूूलत: मिर्जापुर के रहने वाले हैं, ऐसे में पूर्वांचल में भी उन्हें पकड़ बनाने में आसानी होगी।
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