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सांसद की अधिशासी अभियंता को धमकी- तू पिटने का काम कर रहा है, मुकेश ने अपने बचाव में कही ये बात

Mon, 01 Apr 2019 06:56 PM IST
दुष्यंत शर्मा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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सांसद मुकेश राजपूत
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लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होने में चंद घंटे ही बचे हैं। इसके लिए भाजपा सांसद ने बिजली विभाग से एनओसी मांगी। छह लाख से अधिक बिल बकाया होने पर अधिशासी अभियंता ने भुगतान करने को कहा। इससे गुस्साए सांसद ने अधिशासी अभियंता को फोन पर धमकी दी। अधिशासी अभियंता ने मामले की शिकायत जिलाधिकारी से की है। डीएम ने मामला पुलिस अधीक्षक को सौंपते हुए जांच करने के आदेश दिए। 
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अधिशासी अभियंता पंकज अग्रवाल ने जिला निर्वाचन अधिकारी/जिलाधिकारी से शिकायत की है। इसमें कहा कि सांसद ने विद्युत विभाग से एनओसी मांगी थी। फर्रुखाबाद से सांसद मुकेश राजपूत ने पिछले सात वर्षों से बिल का भुगतान नहीं किया है। 31 मार्च की शाम 6.50 बजे सांसद मुकेश राजपूत ने अपने निजी सचिव अनूप मिश्रा के मोबाइल से फोन कर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि तू पिटने का काम कर रहा है, मैं बिल जमा नहीं करूंगा।
 
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अधिशासी अभियंता सपा-बसपा के कार्यकर्ता की तरह काम कर रहे हैं- मुकेश राजपूत

उन्होंने धमकी के आधार पर उनके व परिवार के साथ भविष्य में अनहोनी होने पर सांसद को जिम्मेदार ठहराते हुए सुरक्षा की मांग की है। बताया कि शहर के ठंडी सड़क स्थित सांसद के आवास का उनकी पत्नी सौभाग्यवती देवी के नाम से घरेलू कनेक्शन है। इस पर वर्ष 2012 से अब तक 55 हजार से अधिक यूनिट का 4 लाख 87 हजार 449 रुपये बिल बकाया है। सरचार्ज माफी योजना में एक लाख 19 हजार 111 रुपये की छूट काटने के बाद भी तीन लाख 68 हजार 337 रुपये जमा करने होंगे। वहीं पर सांसद के पुत्र अमित राजपूत का अमित मोटर्स के नाम से कनेक्शन पर एक लाख 32 हजार 345 रुपये का बिल बकाया है। बिना भुगतान कराए बिना वह एनओसी नहीं दे सकते।
 
जिलाधिकारी मोनिका रानी ने बताया कि अधिशासी अभियंता का प्रार्थनापत्र मिला है। उन्होंने प्रकरण पुलिस अधीक्षक को सौंपकर जांच करने के निर्देश दिए हैं। सांसद मुकेश राजपूत ने बताया कि अधिशासी अभियंता ने जो आरोप लगाए हैं वो गलत हैं। वह सपा-बसपा के कार्यकर्ता की तरह काम कर रहे हैं। उनका बिल किसी वजह से जमा नहीं हो सका था। बिल सही करने को अधिशासी अभियंता पंकज अग्रवाल से कहा था। इस पर वह उल्टा सीधा बोलने लगे। उनके व्यवहार व बातचीत करने के तरीके की पहले भी उच्चाधिकारियों से शिकायत की थी।
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