कानपुर देहात। पुखरायां में जमीन विवाद के चलते भाजयुमो के पूर्व जिला उपाध्यक्ष की हत्या के चारों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। एक आरोपी नाबालिग है तो दूसरा दिव्यांग है। अवैध कब्जे में भाजपा नेता का हस्तक्षेप बर्दाश्त न होने पर आरोपियों ने उसकी हत्या की। उनकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त साबड़, हथौड़ी और डंडा बरामद कर लिया है। कोर्ट से आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
पांच मार्च को राजेंद्र नगर पुखरायां निवासी भाजयुमो के पूर्व उपाध्यक्ष अमरेश त्रिपाठी सघन विकास समिति की जमीन में हो रहे अवैध कब्जे को रोकने गए थे। वहां उन पर हमला करके हत्या कर दी गई थी। सिर में भारी वस्तु की चोट से मौत होने का खुलासा पोस्टमार्टम में हुआ था। अमरेश के पिता भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राजेश तिवारी पुखरायां सघन विकास समिति के सदस्य हैं। मामले में अमरेश के भाई त्रिपुरेश ने जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले कस्बा के ही घनश्याम पाल, पत्नी उर्मिला पाल व इनके नाबालिग बेटे व रिश्तेदार एक पैर से दिव्यांग भारत पाल पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस लाइन सभागार में एसपी स्वप्रिल ममगाई ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने अवैध कब्जे का विरोध करने पर आवेश में आकर हत्या करने की बात स्वीकारी है। आरोपियों में भारत का बायां पैर कटा है। इससे वह बैसाखी के सहारे चलता है। वहीं, नाबालिग को किशोर बैरक इटावा भेजा जाएगा। इस घटना में सीओ प्रभात कुमार समेत उनकी टीम को 25 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा।
अधिवक्ता करना चाहता था जमीन पर कब्जा
- विरोध करने जाने पर मौके से खदेड़ा गया था
दिनेश प्रताप सिंह, ‘गौरव’
कानपुर देहात। भाजयुमो के पूर्व उपाध्यक्ष की हत्या में भाजपा से जुड़े एक अधिवक्ता की भूमिका संदिग्ध रही। सूत्रों की मानें तो जमीन विवाद में हमेशा चर्चित रहने वाले इस अधिवक्ता की कीमती जगह पर नजर थी। पांच मार्च की शाम जैसे ही उस जमीन पर कुछ लोगों को टट्टर लगाते देखा तो अधिवक्ता वहां मना करने पहुंचे। अवैध कब्जेदारों ने उन्हें भगा दिया तो बेटे को बुला लिया। पिता, पुत्र से मारपीट हो गई। इस पर दोनों ने भाजयुमो के पूर्व उपाध्यक्ष को आगे कर दिया। साथ ही अपने साथ हुई घटना की बात छिपाकर मौके पर बुला लिया। इधर, पहले से खफा अवैध कब्जेदारों ने दोबारा कई लोगों को आते देखकर हमला कर दिया। अधिवक्ता की होशियारी की कीमत भाजयुमो के उपाध्यक्ष को जान देकर चुकानी पड़ी।
पुखरायां सघन विकास समिति की विवादित जमीन पर भाजपा से जुड़े एक अधिवक्ता कब्जा करना चाहते थे। इस अधिवक्ता का अवैध कब्जे व जमीनी विवादों से गहरा नाता है। क्षेत्र में लोग इसे भू-माफिया कहते हैं। पांच मार्च की शाम अधिवक्ता ने उस जमीन पर कब्जा होते देखा तो मना करने गया। वहां उसकी नहीं चली तो उसने भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सघन विकास समिति के सदस्य राजेश तिवारी के बेटे अमरेश समेत कई युवकों को फोन करके बुलाया। साथियों ने बताया कि अमरेश कभी झगड़े के पक्ष में नहीं रहते थे। उन्हें अधिवक्ता के साथ हुए घटनाक्रम की जानकारी भी नहीं थी। अमरेश को लगा था कि मामूली बात है पहुंच कर समझा दिया जाएगा। शायद पहले के घटनाक्रम का अंदाजा अमरेश को होता तो वह मौके पर न जाते, या फिर पुलिस को सूचना देते। भाजयुमो के पूर्व उपाध्यक्ष समेत लोग मौके पर पहुंचे तो कब्जेदारों को लगा कि अधिवक्ता फिर हमला करने आया है। इस पर कब्जेदार सरिया, डंडा, हथौड़ा लेकर टूट पड़े। भागने में भाजयुमो उपाध्यक्ष गिर गए और अंधेरे में उनके सिर पर भारी वस्तु से वार कर दिया गया। इधर, आरोपियों ने बताया कि घटनास्थल पर अंधेरा होने की वजह से वह अमरेश को देख नहीं पाए थे। अमरेश की पुखरायां में भले व्यक्ति की छवि थी। अब हर कोई अधिवक्ता की इस हरकत को कोस रहा है। यहां तक कि अमरेश के परिजन भी लगातार अधिवक्ता को ही कोस रहे हैं।