भाजपा के पूर्व वरिष्ठ नेता व विचारक केएन गोविंदाचार्य ने कहा कि कोरोना काल में बहुत लोगों को घाटा हुआ है, सिर्फ कुछ को ही फायदा हुआ है। इसमेें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी प्रमुख है। अमीरों की आर्थिक वृद्धि हुई है, जबकि गरीबों की अवनति देखी गई है।
इस व्यवस्था को बदलने की आवश्यकता है। यह स्थिति तब बदलेगी जब लोगों को रोजगार मिलेगा। देश मशीनीकरण से नहीं रोजगार देने से बढ़ेगा। वे शनिवार को बिठूर में आयोजित भारत विकास संगम की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के अवसर पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि हमें गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य को लेकर भारत विकास मंच का गठन किया गया है। यह राष्ट्रीय स्तर पर काम कर रहा है। इसके तहत गांवों को बगैर सरकारी मदद के आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जाता है।
ऐसे गांवाें की परिकल्पना में जल, जमीन, जानवरों का संरक्षण, वर्षा जल का संचयन, प्रकृति आधारित खेती मुख्य है। उन्होंने बताया कि इस तरह का काम कई राज्यों के गांवों में शुरू भी हो गया है। बताया कि देशभर में 127 कृषि पर्यावरणीय भूक्षेत्र हैं, उसके समग्र विकास के लिए काम किया जा रहा है।
कार्यक्रम में कर्नाटक के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वासवराज पाटिल, वंदेमातरम फाउंडेशन के संयोजक माधव रेड्डी, सुरेश अग्निहोत्री, संघ के विभाग संघ चालक श्याम बाबू गुप्ता, मांटू व छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं।
यह है योजना
- हर जिले का एटलस (मानचित्र) बनाया जाएगा
- 2022 तक ऐसे सभी गांवों और जिलों का संगठित समूह तैयार किया जाएगा
- अगली राष्ट्रीय कार्यशाला महाराष्ट्र में होगी।
- गांवों में ऐसे लोगों को तैयार करना जो इस दिशा में काम करना चाहते हैं।