लोकसभा चुनाव 2014 और लोकसभा चुनाव 2019 को भाजपा के स्थानीय नेताओं के लिहाज से देखा जाए तो सीन काफी कुछ बदला हुआ नजर आता है। ऐसे कई नेता जो तब सक्रिय भूमिका में थे, अब हाशिए पर दिख रहे हैं।
कानपुर में पिछले लोकसभा चुनाव में क्षेत्रीय अध्यक्ष की भूमिका में रहे बालचंद्र मिश्र (70) इस बार किसी खास भूमिका में नहीं हैं। पार्टी ने उन्हें प्रदेश स्तर पर वरिष्ठ नागरिक प्रकोष्ठ का संयोजक जरूर बनाया है। लेकिन, जब से पार्टी ने उम्र दराज लोगों को सक्रिय राजनीति से दूर रखने का फैसला किया है तब से वरिष्ठ नेताओं की भूमिका छोटी हो गई।
क्षेत्रीय अध्यक्ष के रूप में उनके पास 2014 में 9 जिलों की छह लोकसभा क्षेत्रों के प्रत्याशियों को जिताने का दबाव था। इसी तरह कई बार सांसद रहे वरिष्ठ व्यापारी नेता श्याम बिहारी मिश्र 2014 के चुनाव में भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय संयोजक थे।
इस बार पार्टी ने राष्ट्रीय संयोजक का पद ही खत्म कर दिया। श्याम बिहारी अब जहां किसी ने बुला लिया तो चले जाते हैं, बाकी पार्टी में उन्हें किसी सक्रिय भूमिका में नहीं रखा गया है। हालांकि की उनकी उम्र 75 साल के करीब है।
इस कड़ी में तीसरा नाम है, जगतवीर सिंह द्रोण का। महानगर सीट से द्रोण तीन बार लगातार सांसद रहे चुके हैं। 2014 के चुनाव में वह महापौर की भूमिका में थे। पार्टी के प्रत्याशी को जिताने में उन्हें विशेष भूमिका में रखा गया था। इस बार वह बाकी बुजुर्ग नेताओं की तरह लोकसभा चुनाव संचालन समिति का हिस्सा हैं। उनकी उम्र भी 75 साल के आसपास है।
इसी तरह भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रहे रवींद्र पाटनी, गोपाल अवस्थी, राधेश्याम पांडेय को भी अब सक्रिय भूमिका से बाहर रखा गया है। इन नेताओं का कहना है कि पार्टी की व्यवस्था है, उसके हिसाब से लोगों को जिम्मेदारी मिलती है। वैसे जो भी जिम्मेदारी मिलेगी, उसे निभाने को वे तैयार हैं।