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अगर आपने बीबीए, बीसीए और बीटेक किया है तो ये कोर्स नहीं कर पाएंगे, छात्रों के लिए जरूरी खबर

Sun, 14 Apr 2019 10:52 AM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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सीएसजेएम विश्वविद्यालय
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कानपुर स्थित छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) और संबद्ध महाविद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया में इस बार विश्वविद्यालय प्रशासन ज्यादा सतर्क नजर आ रहा है। विवि प्रशासन ने ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू होते ही सभी कोर्स के लिए अलग-अलग शैक्षिक अर्हता संबंधित सूचना भी जारी कर दी है। यह भी स्पष्ट किया है कि शैक्षिक अर्हता से अलग हटकर अगर कोई प्रवेश लेता है तो बाद में उसका प्रवेश कैंसिल कर दिया जाएगा।
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रजिस्ट्रार डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि पिछली बार करीब पांच हजार ऐसे छात्रों के प्रवेश रद्द किए गए थे जिन्होंने स्नातक किसी और विषय से किया था और परास्नातक किसी और विषय से करने के लिए एडमिशन ले चुके थे। परीक्षा फार्म भरते समय जब इसकी जांच हुई तो उनके एडमिशन रद्द करने पड़े थे। इसलिए इस बार पहले से ही स्पष्ट निर्देश जारी किए जा चुके हैं। मसलन अगर किसी छात्र ने बीए में हिंदी, इतिहास और शिक्षाशास्त्र की पढ़ाई की है तो एमए में उसे इन्हीं विषयों में से किसी एक विषय का चयन करना होगा।

अगर वह एमए समाजशास्त्र से करना चाहता है तो उसका एडमिशन नहीं लिया जाएगा। इसी तरह बीएससी और एमएससी में भी नियम लागू होंगे। इसके अलावा कई छात्र पिछली बार ऐसे भी आए थे जो बीटेक, बीई, बीसीए, बीबीए जैसे प्रोफेशनल कोर्स कर चुके थे और परास्नातक में एमए, एमएससी करना चाहते थे।

ऐसे छात्रों को भी इस बार एडमिशन नहीं दिया जाएगा। कोर्स और उसमें दाखिले के लिए न्यूनतम शैक्षिक अर्हता की जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट kanpuruniversity.org पर जारी कर दी गई है।
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एमबीए, एलएलबी, एमपीएड में सभी को मौका
डॉ. विनोद कुमार सिंह के मुताबिक कुछ ऐसे भी कोर्स हैं जिनमें किसी भी संकाय से स्नातक करने वाले छात्र एडमिशन ले सकते हैं। इसमें एमबीए, एलएलबी, एमपीएड जैसे कोर्स शामिल हैं। इनके लिए न्यूनतम शैक्षिक अर्हता स्नातक होनी चाहिए।

मान्यता लेना जरूरी
एलएलबी और बीए एलएलबी के लिए इस बार विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। आदेश जारी किया गया है कि लॉ में दाखिले के लिए काउंसलिंग से पहले हर हालत में महाविद्यालयों को विश्वविद्यालय के अलावा बार काउंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता ले लेनी होगी।
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