कानपुर देहात। अधिवक्ता को दी गई बिकरू कांड की केस डायरी की सीडी प्लेयर में नहीं खुली। अधिवक्ता उसे इस शर्त के साथ घर ले गए हैं कि अगर वह नहीं खुलती है तो उसे अस्वीकार कर कोर्ट को वापस कर देंगे। वहीं कई अन्य आरोपियों के अधिवक्ताओं ने सीडी में केस डायरी लेने से इनकार कर दिया है। वह छाया प्रति मांग रहे हैं।
बिकरू कांड की सुनवाई एंटी डकैती कोर्ट सुधाकर राय की अदालत में चल रही है। बुधवार को एक आरोपी सुशील तिवारी के अधिवक्ता योगेश भसीन ने कोर्ट की तरफ से दी जा रही केस डायरी की सीडी स्वीकार कर ली। उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया कि उसे कोर्ट में ही खोल कर दिखा दिया जाए।
इस पर बचाव पक्ष के अन्य अभियुक्तों के अधिवक्ता सीपी शुक्ला, संतोष बाजपेई व पवनेश शुक्ला के सामने कोर्ट ने प्लेयर में सीडी खोलने की कोशिश कराई पर सफल नहीं हुए। इसके लिए जिला जज के यहां से इलेक्ट्रानिक डिवाइस विशेषज्ञ को बुलाया गया लेकिन प्लयेर में सीडी नहीं खुली।
इसके बाद अधिवक्ता योगेश भसीन शर्त के साथ सीडी ले गए कि अगर यह नहीं खुलती है या कोई त्रुटि पाई जाती है तो उसे अस्वीकार कर कोर्ट को वापस कर देंगे। अन्य अधिवक्ता ने केस डायरी की सीडी लेने से इन्कार कर दिया।
तर्क रखा कि इलेक्ट्रानिक डिवाइस में दी जा रही केस डायरी की प्रमाणिकता कैसे की जाएगी। इसे कोर्ट तय करे तभी डिवाइस में केस डायरी ली जा सकती है। बता दें कि केस डायरी 2240 पेज की है। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं को पेन ड्राइव व सीडी में इसे दिया जा रहा है, जबकि वह छाया प्रति मांग रहे हैं।
जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता आशीष तिवारी ने बताया कि एक अधिवक्ता ने केस डायरी की सीडी ले ली है। कोर्ट ने आरोपों पर बहस की तारीख 11 अक्तूबर तय की है। बताया कि आरोपी तलब नहीं किए गए थे।
पनाह देने के आरोपी कोर्ट में हुए पेश
बिकरू कांड के आरोपियों को पनाह देने व हथियार छिपाने में मदद करने के आरोप में रामजी शुक्ला, शुभम पाल, संजय परिहार, अभिनव तिवारी, अमन शुक्ला, विष्णु कश्यप एंडी डकैती कोर्ट में हाजिर हुए।
हालांकि कोर्ट ने आरोपियों को तलब नहीं किया था। इसमें चार आरोपी कानपुर जेल से लाए गए थे जबकि अमन व विष्णु माती जेल से लाए गए। कोर्ट ने घटना के अन्य मुख्य आरोपियों को भी नहीं तलब किया था। इन पर आरोप तय करने के लिए 11 अक्तूबर को बहस होगी।