कानपुर सेंट्रल से बरेली रेलवे स्टेशन के लिए पांच दिन पहले बुक कराई गई एक बाइक अभी तक 284 किमी दूर बरेली नहीं पहुंच सकी है। सेंट्रल के पार्सल विभाग की लापरवाही से बाइक बुक कराने वाले परेशान हैं। कानपुर-जम्मूतवी एक्सप्रेस से स्पलेंडर बाइक बरेली होते हुए जम्मू पहुंच गई है। बाइक को न तो उसे बरेली में उतारा गया और न ही जम्मू में पार्सल विभाग के कर्मचारियों ने ध्यान दिया।
अभी बाइक कहां है, इसकी जानकारी न तो कानपुर के पार्सल विभाग को है और न ही बरेली को। दोनों एक दूसरे पर अपनी गलती का ठीकरा फोड़ रहे हैं। 29 मई की शाम को कानपुर के मंगला विहार फेज दो में रहने वाले अरविंद कुमार मिश्रा ने कानपुर-जम्मू तवी एक्सप्रेस से पार्सल विभाग के माध्यम से बाइक बुक कराई थी। 341 रुपये इसका किराया जमा कर रसीद हासिल की।
ट्रेन 29 मई की देर रात बरेली पहुंची। तीन मिनट के ठहराव के बाद ट्रेन आगे बढ़ गई, लेकिन पार्सल विभाग के कर्मचारी ने बाइक को नहीं उतारा। ट्रेन जम्मू चली गई। 30 मई को अरविंद मिश्रा के पुत्र अनुज मिश्रा जब बरेली स्टेशन पर अपनी बाइक लेने पहुंचे, तो पार्सल विभाग के अफसर-कर्मचारी ने हाथ खड़े कर दिए।
अनुज ने कानपुर पार्सल विभाग को जानकारी दी तो बताया गया कि ट्रेन में बाइक को बुक कर भेजा जा चुका है। अब बरेली के पार्सल विभाग ने जम्मू रेलवे स्टेशन पर संपर्क किया तो वहां बताया गया कि बाइक उतारी नहीं गई। 31 मई को ट्रेन की वापसी पर उसे भेज दिया जाएगा। 31 मई को जब बरेली में पार्सल विभाग ने ट्रेन का पार्सल यान चेक किया तो उसमें बाइक नहीं थी। जानकारी पर पता चला कि किसी दूसरी ट्रेन में उसे भेज दिया गया है।
इस ट्रेन से बाइक को बुक नहीं करना चाहिए था। तीन मिनट के ठहराव में कर्मचारी बाइक कैसे उतारेगा। उनके रिकॉर्ड में बरेली में बाइक रिसीव करने का कोई मैसेज नहीं है। जम्मू में संपर्क किया गया है। जल्द ही बाइक रिसीव करा दी जाएगी।’
- एएन झा, चीफ पार्सल सुपरवाइजर, बरेली
‘जम्मूतवी में बरेली के लिए तमाम पार्सल बुक किए जाते हैं। वहां कर्मचारियों की ड्यूटी थी, वह बाइक को यान से निकालते। बरेली और जम्मू बात कर बाइक दिलाई जाएगी।
- वीके सिंह, चीफ पार्सल सुपरवाइजर, कानपुर सेंट्रल
देरी पर 10 रुपये प्रति घंटा जुर्माना
अगर यह गलती वाहन मालिक से हुई होती तो उसे जुर्माना देना पड़ता। रेलवे के नियम के मुताबिक अगर बाइक पार्सल यान से उतार ली गई होती और रिकॉर्ड में दर्ज समय से बाइक रिसीव करते के दौरान का जुर्माना देना पड़ता है। बाइक और साइकिल के लिए 10 रुपये प्रति घंटे की दर से जुर्माना देना होता है। 15 दिन तक रिसीविंग न करने पर रेलवे नोटिस देता है और छह महीने बाद नीलामी की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।