पुलिस ने आरोपियों के पास से तमाम लोगों के दस्तावेज बरामद किए। उनके कई आधार कार्ड मिले। किसी में नाम अलग तो किसी में पता अलग था। पूछताछ में आरोपियों ने पुष्टि की है कि उन्होंने आधार कार्ड फर्जी बनवाए थे। इसलिए पुलिस ने धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार कर इस्तेमाल करने समेत अन्य धाराएं केस में बढ़ा दी हैं।
साइबर ठगी को अंजाम देने वाले शातिर इंश्योरेंस कंपनी समेत कई अन्य एजेंट से ग्राहकों का डाटा खरीदते थे। प्रति ग्राहक एक रुपये के हिसाब से डाटा लेते थे। हजारों लोगों का डाटा आरोपियों के मोबाइल व लैपटॉप में मिला है।
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जिन कॉल सेंटर से लोगों को कॉल की जाती थी, वहां पर फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वालों को नौकरी पर रखा था। इनको प्रति महीना आठ से दस हजार रुपये सैलरी देते थे। इन्हीं लोगों से फोन करा लोगों को जाल में फांसते थे। क्राइम ब्रांच अब इन कर्मचारियों की भूमिका की भी छानबीन कर रही है।
डीसीपी क्राइम के मुताबिक आरोपी दर्शन श्रीवास्तव व रघुवीर कॉल सेंटर चलाते थे। अतुल कुमार फाइनेंस का काम देखता था। कहां कितनी रकम जमा करनी है, खाते कैसे और कहां खुलवाने हैं सारी जिम्मेदारी उसकी ही थी।
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जांच में सामने आया कि आरोपी गरीब, जरूरतमंदों के नाम से खाते खुलवाकर किराये पर ले लेते थे। ठगी की रकम इन्हीं खातों में मंगवाते थे। खाताधारक को पांच से दस हजार रुपये थमाकर निकल जाते थे। ऐसे में अगर पुलिस ट्रेस करती तो सिर्फ वह खाताधारक तक ही पहुंच पाती थी।
आधार बनाए फर्जी, धाराएं बढ़ाई गईं
पुलिस ने आरोपियों के पास से तमाम लोगों के दस्तावेज बरामद किए। उनके कई आधार कार्ड मिले। किसी में नाम अलग तो किसी में पता अलग था। पूछताछ में आरोपियों ने पुष्टि की है कि उन्होंने आधार कार्ड फर्जी बनवाए थे। इसलिए पुलिस ने धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार कर इस्तेमाल करने समेत अन्य धाराएं केस में बढ़ा दी हैं। पहले केवल आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज था।