हटाया, मगर फिर जमा ली धाक
डीआईजी प्रीतिंदर सिंह ने उस दौरान पूरी स्वाट टीम भंग कर दी थी, लेकिन, कुछ ही दिन बाद कमिश्नरी प्रणाली लागू हो गई थी। लिहाजा क्राइम ब्रांच में दरोगा की दोबारा एंट्री हो गई और उसको सबसे महत्वपूर्ण पद सर्विलांस प्रभारी का दे दिया गया। सवा साल से लगातार वह बतौर सर्विलांस प्रभारी के पद पर रहते हुए गुडवर्क कम अपराधियों के लिए ज्यादा काम करता रहा। सवाल है कि जब उस पर दाग लग चुका था, तो इस पर तैनाती क्यों की गई।
पैरवी करवा रहा, बहाली का प्रयास
सूत्रों के अनुसार एक शातिर अपराधी शहर के एक विधायक का करीबी है। ये अपराधी दरोगा का भी बेहद खास है, इसलिए वह विधायक के जरिये अफसरों से उनकी पैरवी करवा रहा है, जिससे वह बहाल हो सके। अब देखना होगा कि उच्चाधिकारी इस मामले में क्या करते हैं।