कानपुर कचहरी के पास हुए हत्याकांड में कहीं न कहीं पुलिस की भी बड़ी लापरवाही रही। चुनाव के दौरान विवाद होता रहा। खुलेआम फायरिंग भी हुई, कुछ शख्स असलहे लगाकर घूम भी रहे थे। जिसके बारे में पुलिस को जानकारी भी थी लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस ने कहीं पर भी कोई सख्ती नहीं की। पुलिस की सख्ती रहती और जांच पड़ताल की होती तो शायद इतनी बड़ी वारदात नहीं होती।
बार एसोसिएशन के चुनाव के दौरान कई बार विवाद हुआ। झड़प भी हुईं। पुलिस वहीं मौजूद रही लेकिन उसकी कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखी। एक पुलिस अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनकी भी ड्यूटी कचहरी परिसर में लगी थी। कई लोग असलहा लगाए नजर आ रहे थे लेकिन उनको हम लोग नजरअंदाज कर रहे थे। किसी से कोई रोकटोक नहीं की जा रही थी। क्योंकि पुलिस को आशंका थी कि कहीं रोकटोक या सख्ती की तो पुलिस से कोई विवाद न हो जाए। हालांकि यह पुलिस की बड़ी लापरवाही रही। आखिर में शाम ढलते ढलते बड़ी वारदात हो गई।
सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
कचहरी परिसर में अगर कोई भी अवैध असलहे लेकर पहुंचता है तो सीधे तौर पर वहां की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। आखिर सुरक्षाकर्मी क्या कर रहे थे, जो आसानी से असलहे भीतर तक पहुंच गए। उसी से हवाई फायरिंग भी की गई। जब चुनाव से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस अफसरों ने बैठक कर पुलिसकर्मियों को निर्देश भी दिए थे।
सीसीटीवी फुटेज में चेहरे स्पष्ट नहीं
पुलिस कमिश्नर समेत अन्य सभी पुलिस अफसरों ने कई घंटे तक सीसीटीवी फुटेज देखे। फुटेज में अधिवक्ता की ड्रेस में कई लोग नजर आ रहे हैं। हालांकि फुटेज साफ नहीं है। लिहाजा लोगों की पहचान करना संभव नहीं हो पा रहा है। इसलिए पुलिस कमिश्नर ने अपील की है कि घटना के जो चश्मदीद हैं वह पुलिस अफसरों से मिलकर पूरी जानकारी दें। अगर वह चाहेंगे तो उनका नाम आदि गोपनीय रखा जाएगा।
दस मिनट पहले वहां से हटे, गोलीकांड हो गया
विवाद के बाद चुनाव स्थगित कर दिया गया। कचहरी में एसीपी कोतवाली, एसीपी अनवरगंज, एसीपी कर्नलगंज आदि लोगों की ड्यूटी लगी हुई थी। करीब साढ़े छह बजे यह भी शताब्दी गेट से हटकर सिविल लाइंस चौकी चले गए थे। वहां से जाने के करीब दस मिनट बाद ही गोली कांड हो गया था।