श्री लक्ष्मी कॉटसिन का मालिक एमपी अग्रवाल
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श्री लक्ष्मी कॉटसिन पर बैंकों ने आंख मूंदकर भरोसा किया और अरबों रुपये का कर्ज दे डाला। कंपनी ने रेवाड़ी (फतेहपुर) में एक हजार करोड़ रुपये खर्च करके टेक्निकल टेक्सटाइल यूनिट लगाई थी। इसमें बैंकों ने सात सौ करोड़ का लोन दिया था।
इसके अलावा तीन सौ करोड़ का इक्विटी के जरिये निवेश लाया गया था, लेकिन उम्मीद के मुताबिक आर्डर न मिलने पर प्रोजेक्ट फेल हो गया और बैंकों के अरबों रुपये डूब गए। इसके बाद भी बैंकों ने पांच सौ करोड़ के लोन का प्रस्ताव दिया था।
सूत्रों के अनुसार इस यूनिट में केमिकल वार की स्थिति में एबीसी फैब्रिक्स सूट तैयार किए जाने थे। प्रतिरक्षा उत्पाद के क्षेत्र में यह उस समय का बड़ा और जोखिम भरा निवेश था। इसमें बैंकों ने खासी रुचि दिखाई थी। इसके अलावा प्लांट में ब्लैक ऑफ फैब्रिक्स के बड़े पैमाने पर उत्पादन करने की योजना बनी थी। इस तरह के फैब्रिक्स चीन से ही आते थे। उस समय का यह पहला प्लांट था, जहां पर इस तरह का फैब्रिक्स तैयार होता था, लेकिन इसके लिए आर्डर ही नहीं मिले।