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एक चेक को कैश करने में बैंक ने लगाए सात साल, रकम "लाखों या करोड़ों में न थी..."

Fri, 16 Feb 2018 01:00 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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यूपी के कानपुर में बड़ौदा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की यशोदा नगर शाखा ने भविष्य निधि संगठन की ओर से लाभार्थी के खाते में भेजी गई चेक को कैश करने में सात साल लगा दिए।

बिधनू के जरकला गांव निवासी संजीव कुमार सिंह ने 31 मई 2012 को शाखा प्रबंधक के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम में मुकदमा दाखिल किया था।

 
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इसमें बताया था कि भविष्य निधि संगठन नोएडा ने उसके खाते में 04 अप्रैल 2005 को एक चेक (14554 रुपये की) और 15 मई 2005 को दूसरा चेक (5503 रुपये की) लगाया था। बैंक जाकर पता किया तो कहा गया कि अभी उसके खाते में चेक नहीं लगाए गए। कई बार यही कहकर उसे टरकाया जाता रहा।

इसके बाद नोएडा में जानकारी की गई तो बताया गया कि चेक खाते में लगा दिए गए हैं। इसके बाद भी बैंक मानने को तैयार नहीं हुआ। फिर भविष्य निधि संगठन नोएडा की ओर से लिखित में जानकारी दी गई कि दोनों चेक (कुल 20,057 रुपये) खाते में भेजे जा चुके हैं।
 
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यह पत्र बैंक को दिया गया। तब जाकर बैंक ने अपनी गलती मानते हुए 12 फरवरी 2012 को उसके खाते में रुपये भेजे। इसके बाद उसने सेवा में कमी मानते हुए जिला उपभोक्ता फोरम में वाद दाखिल किया। बैंक ने भी अपना पक्ष रखा। फोरम अध्यक्ष डॉ. आरएन सिंह और सदस्य सुधा यादव ने बृहस्पतिवार को वादी के पक्ष में फैसला सुनाया है। 2005 में लाभार्थी के खाते में दो चेक लगाई गईं, इनका पैसा 2012 में खाते में पहुंचा। जिला उपभोक्ता फोरम ने इसे सेवा में कमी मानते हुए कुल राशि पर आठ प्रतिशत सालाना ब्याज देने का आदेश सुनाया है। इसके अलावा पांच हजार रुपये मुकदमा खर्च भी देना होगा।
 
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