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7800 करोड़ रुपये का बैंक घोटाला: आरोपी हीरा कारोबारी उदय देसाई की रिहाई का आदेश कोर्ट से गुम

Sat, 10 Jul 2021 12:06 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

उदय देसाई को मिली अंतरिम जमानत दिन बीतने के साथ कारपोरेट मामलों के मंत्रालय की जांच विंग एसएफआईओ (सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस) के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है।
 
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उदय देसाई - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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करीब 7800 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले के आरोपी हीरा कारोबारी उदय देसाई को विशेष न्यायाधीश से मिली अंतरिम जमानत और मूल फाइल में आदेश न होने का मामला गरमाता जा रहा है। दिल्ली स्थित कारपोरेट मामलों के मंत्रालय ने सीधे अपने स्तर से आदेश खोजने की पहल की है। मंत्रालय की ओर से जिलाधिकारी को ईमेल भेजकर आदेश की सत्यापित प्रति मांगी गई है।
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जवाब में अदालत के लिपिक ने फाइल में आदेश न होने की रिपोर्ट देकर किसी बड़ी धोखाधड़ी की ओर इशारा कर दिया है। उदय देसाई को मिली अंतरिम जमानत दिन बीतने के साथ कारपोरेट मामलों के मंत्रालय की जांच विंग एसएफआईओ (सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस) के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है।

 
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पहले तो जांच एजेंसी को देरी से इसकी जानकारी हुई। अब आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट जाने के लिए उसे आदेश की सत्यापित प्रति की जरूरत है, लेकिन अदालत की फाइल से इसकी मूल प्रति ही गायब है। 22 जून को उदय को मिली 60 दिन की रिहाई में आदेश का पता लगाने में ही 18 दिन गुजर गए।

एसएफआईओ ने पांच जुलाई को आदेश की सत्यापित प्रति के लिए अदालत में आवेदन किया था। चार दिन चली कवायद के बाद आखिर जवाब में लिपिक ने फाइल में आदेश न होने की रिपोर्ट लगाकर आवेदन लौटा दिया। अदालत से खाली हाथ लौटी जांच एजेंसी ने अब आदेश पाने के लिए जिला और जेल प्रशासन का रुख किया है।

एसएफआईओ के वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी ने जिलाधिकारी को ईमेल भेजकर अंतरिम जमानत आदेश की प्रति देने को कहा है। इसमें कहा गया है कि उदय देसाई के अंतरिम जमानत पर छूटने की जानकारी जांच एजेंसी को दो जुलाई को हो सकी। जमानत पर सुनवाई के लिए एजेंसी को पहले से कोई सूचना भी नहीं दी गई। हाईकोर्ट से पांच मई 2020 और 28 अगस्त 2020 को अंतरिम जमानत अर्जी खारिज हुई थी। 25 मार्च 2021 को रेगुलर जमानत अर्जी भी खारिज हो गई थी।
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