करीब 7800 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले के आरोपी हीरा कारोबारी उदय देसाई को विशेष न्यायाधीश से मिली अंतरिम जमानत और मूल फाइल में आदेश न होने का मामला गरमाता जा रहा है। दिल्ली स्थित कारपोरेट मामलों के मंत्रालय ने सीधे अपने स्तर से आदेश खोजने की पहल की है। मंत्रालय की ओर से जिलाधिकारी को ईमेल भेजकर आदेश की सत्यापित प्रति मांगी गई है।
जवाब में अदालत के लिपिक ने फाइल में आदेश न होने की रिपोर्ट देकर किसी बड़ी धोखाधड़ी की ओर इशारा कर दिया है। उदय देसाई को मिली अंतरिम जमानत दिन बीतने के साथ कारपोरेट मामलों के मंत्रालय की जांच विंग एसएफआईओ (सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस) के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है।