शहर में 194 बांग्लादेशी वोटर बने हैं। लोकसभा में प्रश्न उठने के बाद राज्य सरकार के आदेश पर 2009 में एसडीएम सदर ने जांच के बाद इनके नाम वोटर लिस्ट से हटाते हुए भारतीय नागरिकता छीनने की संस्तुति की थी।
इसके बावजूद वोटर लिस्ट में अब तक इनके नाम दर्ज हैं। यह जांच रिपोर्ट भी लापता है। मामला संज्ञान में आने पर जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने कहा है कि इन्हें नोटिस देकर नागरिकता के दस्तावेज मांगे जाएंगे। इसके बाद वोटर लिस्ट से नाम काटे जाएंगे।
लोकसभा में प्रश्न उठने के बाद राज्य सरकार के आदेश पर तत्कालीन एसडीएम सदर प्रहलाद सिंह ने जांच की थी। जांच रिपोर्ट में कहा गया था कि वर्ष 1976 में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से 105 परिवार कानपुर आए थे। इन्हें बांग्लादेश के विस्थापितों का दर्जा देते हुए भारत सरकार के पुनर्वास विभाग ने जमीन देते हुए भौंती में बसाया था।
मात्र तीन साल बाद इनमें से 194 बांग्लादेशी गलत तरीके से दावा पत्र पेश कर वोटर लिस्ट में शामिल हो गए थे। नोटिस देने पर सिटीजन एक्ट के तहत नागरिकता का प्रमाण मांगा गया था। तब विस्थापितों केवकील ने सरकार द्वारा मिली जमीन के कागज की फोटोकॉपी और अन्य दस्तावेज संतोषजनक नहीं थे। इस पर वोटर लिस्ट से नाम हटाने की संस्तुति जिला निर्वाचन अधिकारी से की थी।
आखिर कहां गई जांच रिपोर्ट
निर्वाचन दफ्तर केकर्मचारी कह रहे हैं कि तत्कालीन एसडीएम सदर की जांच के बाद बांग्लादेशियों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे। जांच रिपोर्ट मांगने पर बीड आउट करने की बात कही गई। रिपोर्टर ने महेंद्र नगर बंगाली कालोनी में रहने वाले बांग्लादेशियों की लिस्ट से 2009 की वोटर लिस्ट से मिलान किया।
सभी के नाम इस लिस्ट में थे। जांच रिपोर्ट में नाम हटे या नहीं की स्थिति परखने के लिए 2012 की वोटर लिस्ट देखी तो उसमें भी नाम थे। वर्तमान वोटर लिस्ट में भी इनके नाम हैं।