बांदा जिले में महालक्ष्मी पर्व पर मंगलवार को सुबह नौ बजे केन नदी में नहाते समय भाई-बहन समेत तीन बच्चे गहरे पानी में समा गए। तीनों के शव मिल गए हैं। बच्चों को बचाने में उनकी मां समेत चार महिलाएं भी डूबने से बचीं। गिरवां थाना क्षेत्र के कोलावल रायपुर गांव की महिलाएं बच्चों संग महालक्ष्मी पर्व पर स्नान के लिए केन नदी गई थीं।
नहाते समय बाबूराम का बेटा उमेश (14), बेटी सीता (12) और रामफल का बेटा सूरज उर्फ छोटू (7) गहरे पानी में समा गए। तीनों बच्चों को डूबता देखकर लोगों ने शोर मचाया तो उमेश व सीता की मां कामिनी, सूरज की मां ऊषा व दो अन्य महिलाएं बचाने पहुंचीं, लेकिन डूबने लगीं। मौजूद ग्रामीणों ने चारों महिलाओं को बचा लिया, पर बच्चों को नहीं बचा सके।
सूचना पर पुलिस गोताखोरों संग पहुंची और डूबे बच्चों की खोजबीन शुरू की। कुछ देर बाद सीता व उमेश के शव मिल गए, लेकिन सूरज का शव पांच घंटे बाद घटनास्थल से तीन सौ मीटर दूर जाल में फंसा मिला। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सूरज के पिता रामफल ने बताया कि सूरज तीन भाइयों में छोटा था। बाबूराम ने बताया कि सीता व उमेश की मौत के बाद एक बेटा इंटू बचा है। प्रशासनिक अफसरों ने पीड़ितों को मदद का आश्वासन दिया।
बालिका, किशोरी की डूबने से मौत
महालक्ष्मी पूजन के लिए मां के साथ तालाब नहाने गई किशोरी की गड़ना नाले में डूबकर मौत हो गई। उधर, कोतवाली देहात क्षेत्र के जारी गांव में तालाबनुमा गड्ढे में डूबने से मौत हो गई। बिसंडा क्षेत्र के इटरा मिलौली गांव निवासी अमृता (8) अपनी मां केशकली के साथ मंगलवार को सुबह गड़ना नाला नहाने गई थी।
केशकली स्नान के बाद अन्य महिलाओं के साथ पानी में सूर्य को अर्घ्य देने लगी। इसी बीच तालाब किनारे खड़ी अमृता पैर फिसलने से नाले में गिर गई और डूब गई। जब वह नजर नहीं आई तो मां शोर मचाया। सूचना पर सीओ सियाराम मौके पर पहुंचे और गोताखोरों की मदद से बालिका की तलाश शुरू कराई।
तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बालिका का शव मिला। मृतक बालिका दो बहनों में छोटी थी। भीमराव आंबेडकर विद्यालय में कक्षा-दो में पढ़ती थी। बिसंडा एसओ दिनेश सिंह ने बताया कि परिजनों की मांग पर बिना पोस्टमार्टम के शव परिजनों को साैंप दिया गया है।