दोनों आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई
विशेष अदालत ने सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर दंपती को दोषी करार दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह मामला अत्यंत जघन्य और दुर्लभतम श्रेणी में आता है, जिसमें बच्चों की मासूमियत को तार-तार किया गया। बच्चों के भविष्य को अंधकारमय बनाने और समाज में इस तरह के अपराधों को रोकने के उद्देश्य से, अदालत ने दोनों आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है।
10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने का निर्देश
अदालत ने न केवल आरोपियों को कठोर दंड दिया है, बल्कि पीड़ित बच्चों के परिवारों के प्रति संवेदनशीलता भी दिखाई है। अदालत ने आदेश दिया है कि प्रत्येक पीड़ित बच्चे के परिवार को राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों से 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। यह राशि पीड़ितों के पुनर्वास और उनके भविष्य को सुरक्षित करने में मददगार साबित होगी।