कानपुर। यूपी टी-20 लीग में प्रदेश की प्रतिभाओं को अधिक अवसर देने की तैयारी है, जिसके लिए बाहरी खिलाड़ियों और दूसरे राज्यों के सपोर्ट स्टाफ की भूमिका सीमित की जा सकती है। इस पर निर्णय 30 सितंबर को प्रस्तावित यूपीसीए की वार्षिक आमसभा (एजीएम) में होगा।
लीग की छह फ्रेंचाइजी में फिजियो, वीडियो एनालिस्ट, मसाजर समेत अन्य सहयोगी पदों पर प्रदेश के लोगों को प्राथमिकता देने पर विचार किया जा रहा है। यूपीसीए सचिव प्रेम मनोहर गुप्ता ने कहा कि यूपीटी-20 में रेलवे के खिलाड़ियों की भागीदारी और टीमों में बाहर के सपोर्ट स्टाफ को लेकर सवाल उठे हैं। एजीएम में सभी पहलुओं पर चर्चा के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। मामला पूर्व भारतीय लेग स्पिनर कर्ण शर्मा के लीग के बीच में संन्यास लेने के बाद ज्यादा गरमा गया। रेलवे के लिए खेलने वाले कर्ण शर्मा कानपुर सुपरस्टार्स का हिस्सा थे।
उन्हें नीलामी में करीब 23 लाख रुपये में खरीदा गया था। सत्र के बीच में उनके हटने से फ्रेंचाइजी को आर्थिक और टीम संयोजन, दोनों स्तर पर झटका लगा। यूपीसीए से जुड़े एक अधिकारी का कहना है कि जिन खिलाड़ियों के घरेलू क्रिकेट में यूपी की टीम के लिए खेलने की संभावना नहीं है, उन्हें लीग में मौका देने पर पुनर्विचार जरूरी है। यूपीटी-20 में आईपीएल टीमों के स्काउट्स की नजर रहती है। प्रदेश में अच्छे फिजियो, वीडियो एनालिस्ट, मसाजर और अन्य सपोर्ट स्टाफ उपलब्ध हैं।
उम्रदराज खिलाड़ियों के साथ आयु वर्ग पर भी नजर
यूपीसीए अंडर-16 और अंडर-19 खिलाड़ियों की यूपीटी-20 में भागीदारी के नियमों पर भी विचार कर सकता है। बोर्ड स्तर पर उम्र वर्ग की व्हाइट बॉल प्रतियोगिताएं सीमित होने के कारण इस पर भी नीति बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। हालांकि अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। वहीं लीग को पूरी तरह यूपी के खिलाड़ियों तक सीमित करना यूपीसीए के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। प्रदेश के कई क्रिकेटर बेहतर अवसरों की तलाश में दूसरे राज्यों से खेल रहे हैं।