पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कानपुर प्रवास के दौरान पढ़ते भी थे और पढ़ाते भी थे। घंटाघर के पास हटिया मोहल्ले में स्थित साधना प्रेस में संघ के शिक्षा केंद्र में और इसी के पास स्थित सांझी मंदिर के चबूतरे पर वह बच्चों को पढ़ाते थे।
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अटल जी के साथ चकल्लस करने वाले पं. रामस्वरूप गौड़
- फोटो : अमर उजाला
उनके पढ़ाए हुए कुछ बच्चे जो अब काफी बुजुर्ग हो गए हैं। अपने गुरु के निधन से वह काफी आहत भी हैं।
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी(फाइल फोटो)
पंडित रामस्वरूप गौड़ घंटाघर पुस्तक मार्केट में स्थित सांझी मंदिर के मुख्य कर्ता-धर्ता हैं। उनका कहना है कि शांत क्षेत्र होने की वजह से अटल बिहारी इसी मंदिर के चबूतरे पर लोगों के साथ चकल्लस भी करते थे, साथ ही युवाओं को राजनीति का पाठ भी पढ़ाते थे। इसमें सेवकों की संख्या अधिक होती थी। रामस्वरूप तो उनके पक्के चेलों में से एक थे।
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कानपुर आगमन के दौरान की पुरानी तस्वीर
अटल बिहारी जहां भी संघ का शिविर लगता रामस्वरूप को लेकर जरूर जाते। रास्ते भर यह बताते रहते थे कि गणवेश का अर्थ, इसका महत्व क्या होता है। संघ की उपयोगिता देश और जीवन के लिए क्या है। इसी तरह की तमाम बातें।
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अटल बिहारी वाजपेयी
रामस्वरूप का स्वास्थ्य अब ठीक नहीं रहता है। वह ठीक से चल भी नहीं पाते हैं।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
अटलजी के विषय में पूछते ही एक सांस में शुरू हो गए। बताया कि अटल जी से उनकी पहली मुलाकात 1968 तब हुई जब वह एक चुनावी सभा को यहां पर संबोधित कर रहे थे। उसके बाद से उनका साथ तभी छूटा, जब अटल जी प्रधानमंत्री हो गए। उनका आना-जाना कम हो गया।
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संघ की शाखा भी लगाते थे
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जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी एसडी कालेज में संघ की शाखा लगाते थे। कानपुर में लगने वाली संघ की यह पहली शाखा हुआ करती थी। उसके बाद 1940 में मनीराम बगिया में दूसरी शाखा की शुरुआत हुई। अटल बिहारी वहां भी शाम के समय शाखा में शामिल होते थे।
कानपुर में शिक्षा ग्रहण करने के दौरान उन्होंने अनगिनत स्वयं सेवक तैयार किए। चौक में ही रमाशंकर वाजपेयी की दुकान थी, जहां से वह अपना गणवेश बनवाते थे। वाजपेयी ने लंबे समय तक संघ के स्वयं सेवकों के लिए गणवेश तैयार किया।