महाशिवरात्रि पर्व को लेकर क्षेत्र के खेरेश्वर महादेव मंदिर के कपाट भोर पहर तीन बजे से पूरी रात शिवभक्तों के लिए खुलें रहेंगे। शिवराजपुर के छतरपुर गांव स्थित
खेरेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास द्वापरयुग से है। महाभारत काल में कौरव-पाण्डव के गुरु द्रोणाचार्य ने स्वयं खेरेश्वर महादेव की तपस्या की थी।
यहां के लोगों का दावा है कि करीब वह 36 सौ साल से बदस्तूर आता है और नजदीक पहुंचने से पहले कहीं गुम हो जाता है। वही बता दें कि इस बात को लेकर गांववालों का मानना है कि यह कोई और नहीं द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वथामा है। महाभारत काल में गुरु द्रोणाचार्य खेरेश्वर मंदिर पर आकर पूजा अर्चना करते थे।
इतना ही नहीं पांडव, कौरव और कर्ण ने भी यहीं पर शिक्षा दीक्षा ली थी। खेरेश्वर धाम की मान्यता है कि द्वापर युग में यह गांव पहले गुरु द्रोणाचार्य का आरायण वन हुआ करता था। यहीं पर द्रोणाचार्य ने पांडवों-कौरवों को शस्त्र विद्या सिखायी। मंदिर के महंत आकाश पुरी गोस्वामी कहते हैं कि वह 36 पीढ़ियों से खेरेश्वर महादेव की पूजा कर रहे हैं।