धरती के भगवान माने जाने वाले डाक्टर मोटी कमाई के चक्कर में कर्तव्यों को भी भूल बैठे हैं। इस लापरवाही का खामियाजा मौत से जूझ रही मासूम बालिका को भुगतना पड़ रहा है। तड़पती बेटी को गोद में लेकर गुरुवार सुबह कलेक्ट्रेट पहुंचे परिजन डीएम के सामने फफक कर रो पड़े।
डीएम ने उन्हें इलाज के लिए लोहिया अस्पताल भेजा। वहां भी इलाज के नाम पर औपचारिकता पूरी कर आगरा के लिए रेफर कर दिया गया। डीएम ने नर्सिंगहोम संचालक के खिलाफ जांच सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपी है। कस्बा कमालगंज के मोहल्ला लोहिया नगर निवासी मजदूर बलराम कश्यप की बेटी मोनिका (8) के दो फरवरी को पेट में दर्द हुआ।
मसेनी स्थित नर्सिंगहोम में दिखाने पर सर्जन ने आंत उलझी बताकर आपरेशन कर दिया। इसके बाद नर्सिंगहोम में झोलाछापों की देखरेख के चलते मासूम मोनिका के पेट में जबरदस्त इंफेक्शन फैल गया। 15 दिन के इलाज में एक लाख से अधिक रुपये ऐंठने के बाद स्थिति काबू में न देख 16 फरवरी को मासूम को कानपुर के लिए रेफर कर दिया गया।
हालात यह हैं कि मौत से जूझ रही मोनिका को गोद में लेकर पिता व परिजन कानपुर से लेकर लखनऊ तक भटके, कोई डाक्टर इलाज तो दूर भर्ती करने को राजी नहीं हुआ। इलाज में कर्जदार हो चुके बलराम बेटी को गोद में लेकर सुबह परिजनों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे। जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह को बेटी की हालत दिखाकर फफक कर रो पड़े। इस पर डीएम ने तत्काल लोहिया अस्पताल फोन कर बच्ची को भर्ती करने के निर्देश दिए और परिजनों को वहां भेज दिया।
डीएम का आदेश होने से लोहिया अस्पताल में मासूम को कुछ देर के लिए भर्ती कर इलाज के नाम पर औपचारिकता की गई और उसे आगरा स्थित सरोजनी नायडू मेडिकल कालेज के लिए रेफर कर दिया गया। इससे बलराम तड़पती बेटी को एंबुलेंस से लेकर आगरा चले गए। वहीं जिलाधिकारी को प्रार्थनापत्र देकर नर्सिंगहोम के डाक्टर व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। अंतिम सांसें गिन रही मासूम की हालत पर मां राजेंद्री, नानी रामधनी व अन्य परिजन रोते हुए उसकी जिंदगी की भीख सी मांग रहे हैं।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने बताया कि बच्ची को लेकर परिजन आए थे। उन्हें लोहिया अस्पताल भेजा था। प्रार्थनापत्र के आधार पर नर्सिंगहोम संचालक के खिलाफ जांच सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपी गई। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।