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आशीष का अपराध कानूनी पेशे की नींव पर प्रहार : हाईकोर्ट

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कानपुर। आशीष शुक्ला पर धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े गंभीर अपराध का आरोप है जो कानूनी पेशे की नींव पर प्रहार करते हैं और न्याय प्रशासन में जनता के विश्वास को धूमिल करते हैं। इसी टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने आशीष की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि ऐसे कैसे संभव है कि सिर्फ 12वीं कक्षा के दस्तावेजों को ही दीमक ने नष्ट किया जबकि अन्य शैक्षिक रिकॉर्ड सुरक्षित हैं।
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आशीष शुक्ला उर्फ आशू की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने तर्क रखा कि आशीष 18 दिसंबर 2025 से जेल में बंद है। उसका 25 वर्षीय बेटा और 22 वर्षीय बेटी दोनों ही कानून की पढ़ाई कर रहे हैं और उस पर निर्भर हैं। आशीष की 12वीं की मार्कशीट को दीमक ने नष्ट कर दी है। वहीं अभियोजन ने तर्क रखा कि आशीष ने फर्जी मार्कशीट के आधार पर पहले वकालत की डिग्री हासिल की फिर उसके आधार पर गलत तरीके से यूपी बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया। अदालतों में मुकदमों की पैरवी के लिए वकालतनामे भी दाखिल किए।
अभिलेखों में पिता का नाम भी अलग-अलग है। आशीष अपराधी किस्म का है। उसने जिला जज की ओर से दी गई अग्रिम जमानत की शर्तों का भी पालन नहीं किया। अभियोजन ने कहा कि आशीष ऐसा वकील है जो जाली दस्तावेजों से पंजीकरण कराकर निर्दोष व असहाय वादियों के जीवन और स्वतंत्रता के साथ खिलवाड़ कर रहा है। दोनों पक्षों को सुनने और रिकॉर्ड को देखने के बाद कोर्ट ने अपराध को गंभीर मानते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी।
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कोर्ट की टिप्पणी, नहीं बरती जा सकती नरमी

आशीष की जमानत याचिका पर फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। कहा कि एक वकील केवल मुकदमेबाजी में शामिल एक पेशेवर ही नहीं होता, वह न्यायालय का अधिकारी और न्याय प्रशासन का महत्वपूर्ण स्तंभ होता है। कानूनी पेशे की गरिमा, अटूट सत्यनिष्ठा और विधि के शासन के प्रति वफादारी पर टिकी होती है। जब एक वकील खुद ही गैरकानूनी काम करके पेशे में प्रवेश पाने के लिए अपने ही दस्तावेजों में हेराफेरी करता है तो यह न्याय व्यवस्था के साथ एक गंभीर और जानबूझकर किया गया धोखा है। ऐसा दुराचार न्यायिक प्रणाली में जनता के विश्वास की जड़ पर प्रहार करता है। न्यायालय ऐसे मामलों में नरमी नहीं बरत सकता क्योंकि अनुचित सहानुभूति विधि पेशे की पवित्रता और विश्वसनीयता से समझौता करने के समान होगी।





बार एसोसिएशन के पूर्व मंत्री ने दर्ज कराई थी प्राथमिकी

बार एसोसिएशन के पूर्व मंत्री अरिदमन सिंह ने कोतवाली में आशीष शुक्ला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप है कि आशीष ने इंटर की फर्जी मार्कशीट के आधार पर स्नातक और विधि स्नातक की डिग्री हासिल की। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद आशीष को जिला जज की अदालत से अग्रिम जमानत इस शर्त के साथ मिल गई थी कि वह विवेचक के मांगने पर इंटर की मार्कशीट देगा लेकिन आशीष विवेचक को मार्कशीट नहीं दे सका। शर्तों के उल्लंघन के आधार पर कोर्ट ने अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी थी जिसके बाद आशीष को नैनीताल से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। आशीष की जमानत अर्जी भी जिला जज की अदालत से खारिज हो गई थी। इसके बाद आशीष ने जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था।
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