राजपुर (कानपुर देहात)। बुंदेलखंड की सीमा से सटे यमुना पट्टी में होली की तैयारी जोरो पर है। गांवों में फाग की महफिलें सजने लगी हैं। टोलियां ढोलक की थाप, हरमोनियम व झीके की धुनों के बीच फाग गा रहे हैं। होली के लिए जमकर खरीदारी चल रही है। महिलाएं घरों में मेवा और चिप्स तैयार कर रही है। वहीं, बाजार में रंग-गुलाल और पिचकारी की दुकानें सज गई हैं।
होली पर फागुनी रंग निराला होता है। बीहड़ पट्टी में होली पर फाग की अलग छाप है। इसकी झलक यमुना बेल्ट के गांव बेहमई, खोजा रामपुर, जैसलपुर, गौरीरतन बांगर, भारत, दमनपुर, सिलहरा, सलेमपुर में देखी जा सकती है। त्योहार करीब आते ही फाग की जमातों ने फागुनी रंग जमाना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को राजपुर के भाल गांव में धीरेंद्र द्विवेदी के घर के बाहर में फगुआरों की महफिल सजी और जमकर फाग गायन किया गया।
ढोलक वादक नरेंद्र सिंह उर्फ चंचल के साथ फाग गायक रामप्रसाद, बब्बू दीक्षित, बनाफर मास्टर, अजय पाल सिंह, रविन्द्र सिंह, ओंकार सिंह, बुलबुल, सरमन, छेदीलाल, रधु, इंद पाल, पूर्व शिक्षक रमेश सिंह ने गायन से समां बांध दिया। भाल गांव के प्रधान अरविंद दीक्षित बब्बन ने लोगों को अबीर-गुलाल लगाकर फाग कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक युग में भी गांव में फाग गायकी की धूम रहती है। इससे पुरानी परंपरा जिंदा है।
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होली की तैयारी, खूब हो रही खरीददारी
होली को लेकर सिकंदरा, राजपुर, शाहजहांपुर, रसधान की बाजारों में खरीदारी के लिए खूब भीड़ उमड़ रही है। पर्व पर खुशियों का रंग अपनों के संग बिखेरने को जरूरत के हिसाब से खरीदारी की गई। रंग-गुलाल और पिचकारी की दुकानों पर खूब ग्राहक उमड़े। शुक्रवार को सिकंदरा में साप्ताहिक बाजार में खूब भीड़ रही। पकवान बनाने के सामान की लोग खरीदारी करते दिखे। रंग, गुलाल और पिचकारियों की दुकानों पर बच्चों और युवाओं का जमावड़ा दिखा। चेहरे को ढकने के लिए मुखौटे तो बालों को ढकने के लिए तरह-तरह की टोपियों की खूब बिक्री हो रही है।