हैकिंग को रोकने के लिए 1994 बैच के आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र तरुण आनंद ने स्टार्टअप कंपनी सेम्यूसी शुरू कर एक आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सिस्टम आईओटी (इंटरनेट ऑफ थिग्स) तैयार किया है। इससे सिस्टम से डेटा चोरी होने से पहले ही आपको जानकारी मिल जायेगी और आपका डेटा चोरी होने से बच जाएगा।
मूलरूप से दिल्ली निवासी तरुण आनंद ने बताया उन्होंने आईआईटी से 1994 में कंप्यूटर साइंस से बीटेक किया था। उनकी ऑल इंडिया रैंक 44 थी। बीटेक करने के बाद तरुण ने अमेरिका की टेक्सास ऑस्टिन यूनिवर्सिटी से पीएचडी की। उस दौरान तरुण फाइल सिस्टम पर रिसर्च कर रहे थे।
डेमो पिक
तब माइक्रोसाफ्ट ने कहा कि आप जिस प्रोजेक्ट पर रिसर्च कर रहे हैं, वह हम बना रहे हैं। क्यों न आप हमारे साथ काम करें। इसके बाद उन्होंने विंडोज एंटनी की टीम में काम किया। 1999 में माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स ने उन्हें बुलाया और कहा कि टेकभनोलॉजी को डेवलप करने के लिए कुछ बेहतर बनाओ।
तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद उनकी टीम ने डाटा नेट टेकभनोलॉजी का विकास किया। यह एक तरीके का औजार है, जिससे साफ्टवेयर का निर्माण होता है। विश्व में बनने वाले 50 प्रतिशत साफ्टवेयर इसी टेकभनोलॉजी से तैयार किये जाते हैं।
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तरुण 2005 में इंडिया आ गए और उन्होंने कई कंपनियों के धाराशाही सिस्टम को अपडेट कर जिंदा किया। इसके बाद उन्होंने अपनी स्टार्टअप कंपनी सेम्यूसी शुरू की। इसने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सिस्टम आईओटी तैयार किया। सिस्टम में कोई पार्ट खराब होने पर, कोई वायरस आने पर, किसी के मालवेयर भेजने पर या डाटा लीक होने पर यह सिस्टम इसकी जानकरी देगा।
इससे डाटा लीक नहीं होगा। तरुण ने अपने जूनियर्स को एक संदेश में बताया कि जो भी अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं, उन्हें सबसे पहले मार्केट का ज्ञान होना चाहिए। स्टार्टअप सिर्फ 12 साल पुरानी चीज है, इससे पहले इसका कोई नामोनिशान नहीं था।
भारत में मार्केट का सर्वेक्षण करने के लिए प्रोडेक्ट मैनेजर नहीं हैं। स्टार्टअप में फंडिंग ऑक्सीजन का काम करती है। उन्होंने बताया आज उनकी कंपनी का टर्नओर 10 करोड़ रुपये सालाना है।