अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा संदेश
त्योहार परस्परता के प्रतीक होते हैं। किसी की माटी, किसी का दीया, किसी का सूत, किसी की बाती, किसी का तेल, किसी की खील, किसी का कपड़ा, किसी की सिलाई, किसी का खोआ, किसी की मिठाई, किसी का खिलौना, किसी का बताशा, किसी की फुलझड़ी, किसी का पटाखा… सौहार्द बचा रहेगा तो त्योहार बचा रहेगा। कुछ लोग संकीर्ण राजनीति के लिए नकारात्मक सोच का प्रदर्शन करते रहते हैं। ऐसे लोग दिखावे के लिए ऊपरी तौर पर तो त्योहार मना सकते हैं पर अंदर से ख़ुश नहीं हो सकते हैं।