मैं अपनी मां सुरिंदर कौर, दो बहनों रजवंत कौर (11), गुरमीत कौर (6) व भाई गुरप्रीत (5) के साथ पड़ोसी के घर में छिपी हुई थी। तभी दरवाजे की ओट से देखा कि दंगाइयों ने मेरे पिता भगवान सिंह पर कोई पाउडर (केमिकल) फेंक कर उन्हें जिंदा जला दिया...।
यह देख मैं घबरा गई और अपने भाई की जान बचाने के लिए उसके केश भी काट दिए..। कई दिनों तक हम खुद को सिख बताने में भी घबराते रहे थे..। 1984 में हुए सिख विरोधी दंगे में जान गंवाने वाले भगवान सिंह की वर्तमान में 55 साल की हो चुकी बेटी सुखविंदर कौर ने बुधवार को यह बयान पंजाब गई एसआईटी को दर्ज कराए।
सिख विरोधी दंगों के चार मुकदमों में गवाहों और वादी के बयान दर्ज करने के लिए तीन सदस्यीय टीम पंजाब के लिए रवाना हुई थी। सोमवार को टीम ने पंजाब बटाला के जुझार सिंह नगर में रहने वालीं सुरिंदर कौर के बयान भी दर्ज किए थे। बुधवार को टीम उनकी बेटी सुखविंदर कौर के भी बयान दर्ज करने पंजाब गुरदासपुर के फजलाबाद पहुंची। हत्याकांड के वक्त सुखविंदर की उम्र 13 वर्ष थी। उन्हें अपने पिता की लाश तक नहीं देखने को मिली। दंगाइयों ने सब कुछ लूट लिया था।