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सिख विरोधी दंगा: ओएफसी गेट पर तीन कर्मचारियों की हत्या के मामले में एसआईटी ने की थी पूछताछ

Mon, 28 Dec 2020 03:16 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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सिख दंगा (फाइल फोटो) - फोटो : गूगल
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कानपुर में 1984 के सिख विरोधी दंगे की जांच कर रही एसआईटी को दंगाइयों का पता लगाना चुनौती बन गया है। अर्मापुर में ओएफसी गेट पर तीन कर्मचारियों की हत्या के मामले में एसआईटी ने गवाहों के बयान लिए थे। इनमें से किसी ने भी दंगाइयों का नाम तक नहीं लिया।
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एसआईटी अब ओएफसी प्रशासन से उनकी आंतरिक जांच रिपोर्ट हासिल करने का प्रयास कर रही है। दंगाइयों ने ड्यूटी पर आए तीन कर्मचारियों कुलवंत सिंह, मोहन सिंह व आरएस अरोड़ा की गेट पर पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। अर्मापुर एस्टेट में एक कर्मचारी व उनके बेटे को भी मौत के घाट उतार दिया गया था।
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एसआईटी ने कुछ दिन पहले लुधियाना, चंडीगढ़ और मध्यप्रदेश के जबलपुर जाकर मृत आश्रितों व ओएफसी में तैनात रहे दो कर्मचारियों (एक सिख, दूसरा हिंदू) से भी पूछताछ की थी। किसी ने भी दंगाइयों का नाम और पता नहीं बताया। सूत्रों के अनुसार वारदात के कुछ साल बाद दोनों कर्मचारियों का तबादला हो गया था।

दोनों ने एसआईटी को न तो ठीक से पूरी घटना बताई और न ही भीड़ में शामिल दंगाइयों की पहचान बताई। दोनों ने बस यह जानकारी दी कि सुबह अचानक फैक्ट्री में छुट्टी कर दी गई थी। सभी लोग घर जाने की जल्दी में थे।

इसी दौरान अचानक कहीं से सैकड़ों की भीड़ आई और तीनों पर हमला कर दिया। एसपी एसआइटी बालेंदु भूषण ने बताया कि कर्मचारियों की हत्या मामले में ओएफसी प्रबंधन से भी दस्तावेज मांगे गए हैं। घटना के दिन ड्यूटी पर आने वाले कर्मचारियों का रिकॉर्ड निकलवाने का भी प्रयास किया जा रहा है।
बालेंदु भूषण, एसपी एसआइटी

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