एसआईटी ने कुछ दिन पहले लुधियाना, चंडीगढ़ और मध्यप्रदेश के जबलपुर जाकर मृत आश्रितों व ओएफसी में तैनात रहे दो कर्मचारियों (एक सिख, दूसरा हिंदू) से भी पूछताछ की थी। किसी ने भी दंगाइयों का नाम और पता नहीं बताया। सूत्रों के अनुसार वारदात के कुछ साल बाद दोनों कर्मचारियों का तबादला हो गया था।
दोनों ने एसआईटी को न तो ठीक से पूरी घटना बताई और न ही भीड़ में शामिल दंगाइयों की पहचान बताई। दोनों ने बस यह जानकारी दी कि सुबह अचानक फैक्ट्री में छुट्टी कर दी गई थी। सभी लोग घर जाने की जल्दी में थे।
इसी दौरान अचानक कहीं से सैकड़ों की भीड़ आई और तीनों पर हमला कर दिया। एसपी एसआइटी बालेंदु भूषण ने बताया कि कर्मचारियों की हत्या मामले में ओएफसी प्रबंधन से भी दस्तावेज मांगे गए हैं। घटना के दिन ड्यूटी पर आने वाले कर्मचारियों का रिकॉर्ड निकलवाने का भी प्रयास किया जा रहा है।
बालेंदु भूषण, एसपी एसआइटी