रोगियों को रेफर करने की नौबत नहीं आएगी
उन्होंने बताया कि इसकी सबसे अहम भूमिका मस्तिष्क के इलाज में है। इसके अलावा शरीर के किसी भी हिस्से की नस में अगर लीकेज है तो उसे बंद किया जा सकता है। इसके अलावा नसों की और भी समस्याओं का इलाज हो जाता है। शरीर की नसों से संबंधित 90 फीसदी रोगियों को रेफर करने की नौबत नहीं आएगी। इसके साथ ही गुर्दा प्रत्यारोपण में भी इसका उपयोग रहेगा।
हर साल रोगियों की संख्या में हो जाता है इजाफा
प्रत्यारोपण के बाद अगर किसी रोगी की नस में लीकेज होता है, तो उसे इस मशीन से ठीक किया जा सकता है। मेडिकल कॉलेज के न्यूरो साइंसेस प्रमुख डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि एन्यूरिज्म की दिक्कत में इस डीएसए मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। नसों के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। हर साल रोगियों की संख्या में 15 से 20 फीसदी इजाफा हो जाता है।
उंगलियों की हो सकेगी माइक्रो सर्जरी
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि एडवांस माइक्रोस्कोप का भी प्रस्ताव भेजा गया है। इससे कटी उंगलियों की सटीक माइक्रो सर्जरी हो सकेगी। सर्जरी विभाग के पास दो प्लास्टिक सर्जन उपलब्ध हैं। माइक्रोस्कोप आने के बाद बारीक सर्जरी होगी। इसके साथ शासन से पोर्टेबल सीटी स्कैन मशीन, चार सी आर्म, एक ओ आर्म, लेजर, लैसिक लेजर आदि उपकरण मांगे गए हैं। इनके प्रस्ताव शासन को भेज दिए गए।