वहीं, दूसरे कमरे में उनका छोटा भाई रामजी अपनी पत्नी रजनी व दो बच्चों स्पर्श और मोमो के साथ रहते हैं। छोटे भाई रामजी ने बताया कि वह अपने बड़े भाई के साथ ग्राउंड फ्लोर पर बने कारखाने में चारा मशीन बनाने का काम करते थे। बेटी निमिषा ने बताया कि रविवार देर रात करीब 10.30 बजे खाना खाने के बाद चाचा परिवार के सभी लोग अपने अपने कमरे में सोने चले गए थे।
छोटे भाई ध्रुव के मुंह से झाग निकलने लगा
ठंड से बचने के लिए दादी ने कमरे में अंगीठी जला दी थीं। इस दौरान खिड़की और दरवाजे बंद कर दिए थे। देर रात करीब दो बजे अचानक छोटे भाई ध्रुव के मुंह से झाग निकलने लगा। उल्टियां शुरू हो गई। ध्रुव को उल्टियां करता देख निमिषा उठी तो उसे चक्कर सा महसूस हुआ, तो उसने खिड़की खोल दी। छोटे भाई को दवा देने के बाद वापस सो गए।
जगाने का प्रयास किया, लेकिन शरीर में कोई हलचल नहीं मिली
सुबह करीब आठ बजे दूधिया जब घर आया, तो निमिष ने अपने पिता को जगाने का प्रयास किया, लेकिन पिता के शरीर में कोई हलचल नहीं मिली। इसके बाद उसके चाचा रामजी को आवाज देकर बुलाया। परिजन आनन फानन में चाचा पड़ोसियों की मदद से पिता नरेंद्र शर्मा, बाबा पूरन चंद्र और दादी मिथिलेश को लेकर कार्डियोलॉजी पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।
पांच दिन से अस्वस्थ्य चल रहा था ध्रुव
निमिषा ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि पिछले पांच दिन से ध्रुव का स्वास्थ्य खराब चल रहा है। उसका एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। देर रात करीब 12 बजे भी ध्रुव को उल्टियां हुई थी। पुलिस जब मौके पर पहुंची, तो कमरे में भी अंगीठी पड़ी मिली। वहीं, चौतरफा उल्टी पड़ी हुई थी।
प्राथमिक जांच में ठंड से बचने के लिए कमरे में रखी अंगीठी से निकलने वाली जहरीली धुएं से दम घुटने के चलते मौत की पुष्टि हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कारवाई की जाएगी। -रविंद्र कुमार, डीसीपी साउथ