परमट स्थित बाबा आनंदेश्वर मंदिर के शिवलिंग की सुरक्षा के लिए अब श्रद्धालु भी सजग हुए हैं। उनका कहना है कि मंदिर में केमिकल युक्त सामग्री, सिक्के या चाभी नहीं घिसना चाहिए। इसके लिए लोगों का जागरूक होना जरूरी है। गंगा किनारे स्थित बाबा आनंदेश्वर मंदिर में हर दिन करीब 50 हजार श्रद्धालु आते हैं। सावन माह और महाशिवरात्रि पर यह संख्या लाखों में होती है। अधिकतर भक्त शिवलिंग (शिवलिंग) को काफी देर तक रगड़ते और धार से पानी डालते हैं। कुछ लोग तो सिक्के या तिजोरी, कार की चाभी और माला भी इस पर घिसते हैं। इससे शिवलिंग का आकार घट रहा है। अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में इससे संबंधित खबर प्रकाशित की थी।
भक्त-भगवान के बीच न हो व्यवधान
जूना अखाड़ा के मीडिया प्रभारी आशुतोष कुमार अंश ने बताया कि भक्त और भगवान के बीच कोई व्यवधान नहीं आना चाहिए। जूना अखाड़ा का मानना है कि भक्तों को बाबा के दर्शन सुगम तरीके से होने चाहिए। शिवलिंग का आकार कम होने से बचाने के लिए जूना अखाड़ा के संरक्षक हरि गिरि महाराज से वार्ता की जाएगी। भक्तों और मंदिर प्रशासन मिलकर शिवलिंग को सुरक्षित करने के लिए सावधानी बरतते हुए पूजा की जाएगी।
यह एक गंभीर मामला
10 साल से मंदिर आ रहे हैं। यह एक गंभीर मामला है। भक्तों को ध्यान रखना होगा कि बाबा के शिवलिंग को नुकसान न पहुंचे। - गोलू पांडे, साकेतनगर
केमिकल युक्त सामग्री पर प्रतिबंध लगे
सात साल से नियमित दर्शन करने आ रहे हैं। केमिकल युक्त सामग्री पर प्रतिबंध लगे। ध्यान देना होगा कि शिवलिंग को हानि न पहुंचे। - अनिल कुमार साहू, वन विभाग कर्मी
चिंताजनक है मामला
वर्ष 1996 से लगातार हर दिन बाबा आनंदेश्वर के दर्शन करने के लिए आ रहे हैं। शिवलिंग का लगातार कम होना एक चिंता का विषय है। - सुशील कुमार सचान, बर्रा
जूना अखाड़ा की देखरेख में व्यवस्थाएं सराहनीय
बाबा आनंदेश्वर धाम की व्यवस्था जूना अखाड़े के आने से काफी बेहतर हुई है। लोगों को मंदिर प्रबंधन के निर्देशों का पालन करना चाहिए। - अनुष्का अग्निहोत्री, सहायक चार्टर्ड अकाउंटेंट
सिक्का, चाभी न घिसें
करीब 20 साल से हर दिन बाबा के दरबार जा रहे हैं। जब खबर पढ़ी तो चिंता होने लगी। भक्तों को सिक्का या चाभी नहीं घिसनी चाहिए। - राम जसलानी, रतनलालनगर
कोई व्यवस्था बननी चाहिए
करीब 15 साल से हर सोमवार और पूरे सावन मंदिर जाते हैं। शिविलिंग बचाने के लिए मंदिर प्रबंधन को कोई व्यवस्था करनी चाहिए। - ललित श्यामदासानी, पांडुनगर