पांच किमी. पैदल चाल में गोल्ड मेडल जीतने वाले आनंद कुमार शर्मा मेडल दिखाकर जश्न मनाते
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मलेशिया के पेनांग शहर में चल रही एशिया पैसिफिक मास्टर्स गेम्स 2018 में यूपी के उन्नाव जिले के आनंद कुमार शर्मा ने पांच किलोमीटर पैदल चाल में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा है। बेटे की सफलता से माता-पिता की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। घर में बधाई देने वालों का तांता लगा है। शहर के आवास विकास कालोनी निवासी राम विनायक शर्मा के पुत्र आनंद कुमार शर्मा ने कक्षा नौ तक की पढ़ाई राजकीय इंटर कालेज में की। इस दौरान सन् 1999 में पहली बार कालेज की तरफ से पंडित दीनदयाल स्पोर्ट्स स्टेडियम में पांच किलोमीटर पैदल चाल प्रतियोगिता में भागीदारी की। आनंद ने पहला स्थान हासिल कर अपनी मेधा का लोहा मनवाया।
बड़े बाई रामकृपाल से प्रोत्साहन और अपने मजबूत इरादों वाले आनंद ने सन् 2000 में फैजाबाद मंडल प्रतियोगिता में गोल्ड जीतने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा। 2001 में साईं स्पोर्ट्स एकेडमी आफ इंडिया भोपाल में दाखिला लिया। इसके बाद 2004, 2006 में मध्य प्रदेश में आयोजित पैदल चाल प्रतियोगिताओं में बाजी मारकर प्रतिभा का लोहा मनवाया। वहीं 2008 में 11 वीं वाहिनी सीतापुर में यूपी पुलिस आरक्षी पद पर स्पोर्ट्स कोटा में नौकरी मिली।
इस दौरान प्रतियोगिताओं में भागीदारी कर प्रतिभा का जलवा बिखेरा। 7 सितंबर से मलेशिया के पेनांग शहर में चल रही एशिया पैसिफिक मास्टर्स गेम्स 2018 में आनंद कुमार शर्मा को सपना सच साबित करने का मौका मिला। 11 सितंबर को आनंद ने पांच किलोमीटर पैदल चाल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत लिया। मंगलवार देर रात पिता रामविनायक शर्मा व मां सरला देवी को आनंद ने गोल्ड मेडल जीतने की खुशखबरी दी तो परिजन खुशी से झूम उठे।
पिता को है पहलवानी का शौक,
आनंद कुमार शर्मा के गोल्ड मेडल जीतने पर खुशियां मनाते माता-पिता व परिवार के लोग
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बुधवार सुबह से ही घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। बड़े भाई आरके शर्मा व आशीष ने माता पिता को मिठाई खिलाकर भाई की उपलब्धि का जश्न मनाया। इस दौरान बहन संतोषी देवी व राखी की भी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। आनंद कुमार शर्मा का जन्म 3 नवंबर 1986 में हिलौली ब्लाक के भटपुरा मवई में हुआ था। आनंद की महज नौ साल की उम्र में खेल में रुचि थी। शुरुआती दौर में क्रिकेट का बल्ला थामा। बाद में एथलेटिक्स की तरफ कैरियर बढ़ाया। सन् 1999 में पहली बार पं. दीनदयाल स्टेडियम में पांच किमी पैदल चाल का हिस्सा बने और शील्ड जीती। इसके बाद सन् 2000 में फैजाबाद मंडल में आयोजित क्रास कंट्री रेस में पहला स्थान हासिल किया।
सन् 2001 में एसएआई हास्टल टीटी नगर भोपाल, सन् 2002 में मध्य प्रदेश टीम से नेशनल 20 किमी. में और सन् 2003 में तात्या टोपे नगर में आयोजित प्रतियोगिता में प्रथम स्थान लाने पर मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर ने शील्ड व मेडल देकर पुरस्कृत किया था। वहीं सन् 2004 में आल इंडिया इंटर यूनिट की 20 किमी पैदल चाल, सन् 2005 में आल इंडिया पुलिस की 20 किमी पैदल चाल प्रतियोगिता में खेले और विजेता रहे।
आनंद के पिता राम विनायक अपने जमाने में कुश्ती के कुशल खिलाड़ी रहे हैं। रामविनायक ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि बेटे ने जो आज खुशी दी है। उससे जीवन धन्य हो गया है। बताया कि सन् 1962 में इलाहाबाद शहर में आयोजित कुश्ती प्रतियोगिता में मेरठ के पहलवान को पटखनी देकर कुश्ती जीती थी। बताया कि सन् 1966 में बहरीन में रहने के दौरान बातों बातों में पाकिस्तान के पहलवान मो. उमर को पटखनी दी थी। इस पर शेख ने पुरस्कृत कर सम्मानित किया था।