प्रदूषण प्रमाण पत्र बनाने के लिए एजेंसियों को जिम्मेदारी दी गई है
इन वाहनों के प्रदूषण की स्थिति बताने के पीछे वजह यह है कि जब आलाधिकारियों के वाहनों की यह स्थिति है, तो शहर में रोजाना दौड़ रहे करीब छह लाख वाहनों की स्थिति की पड़ताल कैसे होती होगी। वैसे शहर में अलग-अलग स्थानों पर आरटीओ की ओर से प्रदूषण प्रमाण पत्र बनाने के लिए एजेंसियों को जिम्मेदारी दी गई है। जहां से किसी भी वाहन के नंबर के आधार पर यह आसानी से पता लगाया जा सकता है कि किसी वाहन का पीयूसी बना है या नहीं।
आम जनता तो चालान के डर से बनवा लेती है पीयूसी
प्रदूषण से जुड़े मामले को इस वजह से भी उठाया जा रहा है कि सरकारी विभाग के अधिकारी भी जागरूक हों, क्योंकि आम जनता तो चालान कटने के डर से अपने वाहनों का प्रदूषण नियंत्रण सर्टिफिकेट बनवा लेते हैं। शहर की प्रथम नागरिक महापौर प्रमिला पांडेय, कानपुर के डीएम विशाख जी. से लेकर प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अफसरों की गाड़ियां भी बिना पॉल्यूशन सर्टिफिकेट (पीयूसीसी) के चल रही हैं।
ये अफसर भी बिना प्रदूषण सर्टिफिकेट लिए चलते हैं
- एसडीएम सदर अजय गौतम (यूपी 78 एचएफ 9214), एडीएम एफआर राजेश कुमार (यूपी 77 एक्स 0697) का पीयूसीसी 20 अगस्त को खत्म हो गया।
दोनों आरटीओ की गाड़ियों में मिला पीयूसी
- आरटीओ प्रशासन राजेश सिंह की गाड़ी (यूपी 78 जीएन 9798) में तीन सितंबर 2024 तक और आरटीओ प्रवर्तन विदिशा सिंह की गाड़ी (यूपी 32 आरएन 3927) में पीयूसीसी एक अगस्त 2024 तक है।
इन वजहों से फैलता है प्रदूषण
सड़कों से उठने वाली धूल, वाहनों से निकलने वाला धुआं, कूड़ा जलाने से उठने वाला धुआं, औद्योगिक इकाइयों की चिमनियों से निकले वाला धुआं प्रमुख है। खुले में रखी निर्माण सामग्रियों रेत, बालू भी इसकी बड़ी वजह है।
पीयूसी बनवाने के ये है मानक
- यदि वाहन का इंजन बीसए-4 है तो उसके लिए हर छह महीने में पीयूसी बनवाना पड़ता है।
- यदि वाहन का इंजन बीसए-6 है तो उसके लिए हर एक साल में पीयूसी बनवाना पड़ता है।
अपील: माना गाड़ियां आउट सोर्सिंग की हैं, पर जिम्मेदारी आपकी भी
पुलिस अधिकारियों की गाड़ियां छोड़ दें तो बाकी विभागों में गाड़ियां आउट सोर्सिंग पर लगी हैं। हालांकि जिम्मेदारी इन वाहनों से चलने वाले अफसरों की भी है। वे अपने वाहनों को हर लिहाज से दुरुस्त रखें।
किसी भी वाहन का प्रदूषण प्रमाण पत्र (पीयूसी) यदि नहीं है, तो उसके खिलाफ 10 हजार रुपये के चालान होता है। किसी वाहन का यदि प्रमाण पत्र एक्सपायर हो गया है, तो एम परिवहन एप या पोर्टल पर एक्सपायरी डेट दिखाता है। किसी ने लंबे समय से पीयूसी चेक नहीं कराया है, तो एनए यानि नॉट अप्लायड दिखाता है। -मानवेंद्र सिंह एआरटीओ प्रवर्तन
डीएम बोले- पीयूसी बनवाना होगा अनिवार्य
वाहनों के प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं बनाए जाने के संबंध में जब जिलाधिकारी विशाख जी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इसे लेकर वह एक आदेश जारी कर रहे हैं, जिसमें सभी वाहनों का पीयूसी बनवाना अनिवार्य होगा। कहा कि सभी सरकारी वाहनों की विशेष मॉनीटरिंग कराई जाएगी।