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अमर उजाला स्वास्थ्य अभियान: 15 से 17 साल आयु वर्ग के लाभार्थी बने टीकाकरण के अघोषित ब्रांड एंबेसडर, बेझिझक लगवाई वैक्सीन

Sun, 27 Mar 2022 12:16 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

15 से 17 साल आयु वर्ग के ये लाभार्थी अपने से बड़े और छोटे आयु वर्ग के लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वैक्सीन की दोनों डोज लगवाने वाले इन लाभार्थियों ने बताया कि वे बड़ों के मन से झिझक और छोटों के दिल से डर निकालकर उन्हें वैक्सीनेशन की अहमियत बता रहे हैं।
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कोरोना वैक्सीन - फोटो : Social media
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विस्तार
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कोरोना काल के पहले तक लोगों के माइंड सेट में सेहत की उतनी अहमियत नहीं रही। महामारी के झटके बाद सबसे अधिक बदलाव किशोरों और युवाओं के माइंड सेट में आया है। वे सेहत को लेकर अधिक सतर्क और संवेदनशील हो गए हैं। कोरोना काल का हाल देखकर बीमारियों से उनके मन में डर घर कर गया है।
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यही वजह है कि 15 से 17 साल आयु वर्ग के लाभार्थियों ने वैक्सीन को बहुत अहमियत दी है। वे वैक्सीन लगवाने के लिए खुशी-खुशी आगे आ रहे हैं। यही नहीं, कोवाक्सिन की दोनों डोज लेने के बाद वे अब अघोषित तौर पर वैक्सीनेशन के ब्रांड एंबेसडर बन गए हैं। 15 से 17 साल आयु वर्ग के ये लाभार्थी अपने से बड़े और छोटे आयु वर्ग के लोगों को वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

वैक्सीन की दोनों डोज लगवाने वाले इन लाभार्थियों ने बताया कि वे बड़ों के मन से झिझक और छोटों के दिल से डर निकालकर उन्हें वैक्सीनेशन की अहमियत बता रहे हैं। 15 से 17 साल आयु वर्ग के लाभार्थियों को कोवाक्सिन लगाई जा रही है। बहुत से लाभार्थी 28 दिन पूरे होने के बाद वैक्सीन की दूसरी डोज भी लगवा चुके हैं।
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इस आयु वर्ग के लाभार्थियों में अभी तक किसी को भी वैक्सीन लगवाने के बाद कोई दिक्कत नहीं हुई। स्वास्थ्य विभाग के पास ऐसा एक भी केस नहीं आया है, जिसमें वैक्सीन लगने के बाद कक्षा छूटी हो। दोनों डोज पूरी होने के बाद ये लाभार्थी आत्मविश्वास से लबरेज हैं।

इंदिरानगर के रहने वाले ऋषिकेश सिंह राजपूत (16) ने बताया कि कोरोना काल का डर ऐसा था, जिसने जेहन में झिझक नहीं पैदा होने दी। वैक्सीन लगने के बाद कोरोना का डर जरूर कम हुआ है। जिन लोगों ने अभी तक वैक्सीन नहीं लगवाई थी, उनका हौसला बढ़ाया, जिससे वे भी वैक्सीनेटेड हो गए।

कई जान-पहचान के लोग कोरोना संक्रमण के कारण अपने जीवन से हाथ धो चुके हैं। ऐेसे में वैक्सीन बहुत जरूरी है। नानकारी के रहने वाले आदित्य प्रसाद (16) का कहना है कि वैक्सीन लगवाई, कुछ दिक्कत नहीं हुई। यही बात वे अपने से छोटों को भी बता रहे हैं। इस वक्त 12 से 14 साल वालों को वैक्सीन लग रही है।

 

अगर किसी को जरा सी हिचक होती है तो उन्हें समझा दिया जाता है। उनको अपना उदाहरण दे देते हैं। कोरोना की कितनी लहरें आएंगी, ये तो पता नहीं है। वैक्सीन लगवाने के बाद अगर किसी को कोरोना हुआ भी तो कम से कम जानलेवा नहीं होगा। पोस्ट कोविड जटिलताएं भी उतनी नहीं होंगी।

विजयनगर की रहने वाली छात्रा अंशिका तिवारी (15) का कहना है कि वैक्सीन ही बचाव के एकमात्र रास्ता है। इससे किसी तरह की दिक्कत नहीं होती। लोगों को भी समझाते हैं कि वैक्सीन लगवाकर खुद को सुरक्षित कर लें। दूध वाला बंगला के रहने वाले साहिल कुमार (15) ने ग्रीनपार्क स्टेडियम के मेगा कैंप में कोवाक्सिन की दूसरी डोज लगवाई।

पहली डोज 23 फरवरी को लगवाई थी। उन्होंने बताया कि वैक्सीन लगवाने में कोई दिक्कत नहीं हुई। वह 12 से 14 साल आयु वर्ग के अपने क्षेत्र के लाभार्थियों को भी वैक्सीन के लिए प्रेरित कर रहे हैं। बताते हैं कि लोगों से वैक्सीन के संबंध में जानकारी ली और उन्हें इसके लिए प्रेरित किया। ऐसे कई लोग हैं, जो अब दूसरी डोज भी ले चुके हैं और उन्हें कोई दिक्कत भी नहीं हुई। इसी तरह इस आयु वर्ग के अन्य लाभार्थी भी वैक्सीन लगवाने के बाद उत्साहित हैं।

 
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आंकड़े
15 से 17 साल आयु वर्ग
लक्ष्य : तीन लाख 21 हजार 311
पहली डोज लगी : दो लाख 66 हजार 647
दूसरी डोज लगी : एक लाख 32 हजार 762

12 से 14 साल आयु वर्ग
लक्ष्य : 1.94 लाख
26 मार्च तक लगी 1238 डोज

नए सिरे से बनेगी टीकाकरण केंद्रों की सूची
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. अमित कनौजिया ने बताया कि 15 से 17 साल आयु वर्ग के लिए स्कूलों में टीकाकरण केंद्र बनाने के लिए नए सिरे से सूची तैयार की जा रही है। इसके पहले स्कूलों में वैक्सीन लग रही थी, लेकिन बीच में होली की छुट्टियां पड़ गईं। जिला विद्यालय निरीक्षक से बात करके फिर स्कूलों की सूची मांगी गई है। इसके अलावा 12 से 14 साल आयु वर्ग के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी से सूची मांगी गई है।
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