सालाें बाद इस अंदाज में मिलें आईआईटी के पूर्व छात्र
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आईआईटी में 1995 बैच के छात्रों की एलुमनाई मीट में पूर्व छात्रों ने संस्थान को 1.7 करोड़ रुपये की गुरुदक्षिणा दी। पूर्व छात्रों ने दक्षिणा के साथ साथ संस्थान के दो हॉल के रेनोवेशन के लिए भी हामी भरी। मीट ऑडिटोरियम में निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने सभी का स्वागत किया।
एलुमनाई मीट के कोआर्डिनेटर अटल बंसल ने पूर्व छात्रों से कहा कि औपचारिकताएं छोड़िए, पहले यह बताइए कौन-कौन संस्थान को गुरुदक्षिणा देगा। इसके बाद सभी छात्रों ने शपथ भरे। इससे पूर्व संस्थान का भ्रमण करने के साथ कई पुराने किस्सों का भी पूर्व छात्रों ने जिक्र किया। छात्रों ने कहा कि इतने सालों में आईआईटी तो काफी बदल गया। हालांकि हरियाली में और इजाफा हुआ है।
परिवार के साथ पहुंचे आईआईटी
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हमारे समय में नहीं होती थी रैगिंग
हमारे समय में कोई रैगिंग नहीं होती थी। एक स्वस्थ माहौल में नए छात्रों का परिचय करवाया जाता था। अभी भी ऐसा ही होगा। यह कहना है पूर्व छात्र भगवान स्वरूप का जो मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश के गृहसचिव हैं। 1998 बैच के आईपीएस भगवान स्वरूप कहते हैं कि यूपी कॉप एप्लीकेशन लांच की है जो 29 नागरिक सेवाएं प्रदान करती है।
शहर में डिप्टी सीटीएम पद पर रह चुके शिवेंद्र
1995 बैच के मेकेनिकल विभाग के शिवेंद्र शुक्ला शहर में डिप्टी सीटीएम (उप मुख्य यातायात प्रबंधक) के पद पर रह चुके हैं। वर्ष 2010 से 2012 तक डिप्टी सीटीएम रहे शिवेंद्र वर्तमान में इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट में प्रोफेसर के पद हैं। शिवेंद्र अपने परिवार के साथ शामिल होने आए थे। शिवेंद्र कहते हैं कि संस्थान की प्रगति को देखकर अच्छा लगता है। पुराने दोस्तों के साथ मिलकर यादें ताजा हो गईं।
कुछ इस अंदाज में मिले पूर्व छात्र
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पुरानी बातें याद कर हो जाते तरोताजा
सिविल इंजीनियरिंग ब्रांच के क्षितिज कुमार दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) में उच्च पद पर आसीन हैं। क्षितिज कहते हैं के संस्थान में की गई मौज मस्ती यहीं के साथ खत्म हो गई, लेकिन कई बार पुरानी यादों को याद कर तरोताजा हो जाया करते हैं। क्षितिज कहते हैं कि एलीवेटेड मेट्रो अंडरग्राउंड ट्रैक की तुलना में पांच गुना तक सस्ती होती है।
विदेशों में एटीएम-क्रेडिट कार्ड फ्रॉड नहीं होते
केमिकल ब्रांच के तुषार पांडे हांगकांग स्थित बैंक में कार्यरत हैं। तुषार कहते हैं कि विदेशों में साइबर सिक्योरिटी बेहद सख्त है। वहां एटीएम और क्रेडिट कार्ड से संबंधित फ्रॉड नहीं होते हैं। विदेशों में बैंकिंग बिग डाटा और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के साथ आगे बढ़ रही है।