आज इच्छा नवमी है। आचार्य दीपक पांडेय और आचार्य सत्येंद्र अग्निहोत्री ने बताया कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी आंवला नवमी के रूप में मनाई जाती है। इसे अक्षय नवमी या इच्छा नवमी के नाम से भी जाना जाता है।
इस दिन सुबह व्रत और पूजन का संकल्प कर महिलाएं खीर और पूड़ी बनाकर आंवले के पेड़ के नीचे पहुंचकर जल और दूध से आचमन करती हैं। इसके बाद रोली और मौली बांधकर आंवले के पेड़ का पूजन किया जाता है।
साथ ही उसी पेड़ के नीचे बैठकर ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद स्वयं भोजन करती हैं। मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने अक्षय नवमी को कुंती को इच्छा नवमी का व्रत करने की सलाह दी थी। तब कुंती ने यह व्रत किया था। तब से यह व्रत चला आ रहा है।