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इत्रनगरी की सियासत: विरासत संभालने 15 साल बाद कन्नौज लौटे अखिलेश यादव

Thu, 25 Apr 2024 05:58 PM IST
शिखा पांडेय तारिक इकबाल, अमर उजाला, कन्नौज
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अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला
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सपा मुखिया अखिलेश यादव 15 साल बाद फिर से इत्रनगरी से सियासी ताल ठोकेंगे। पिछले कई दिनों से जारी सस्पेंस खत्म करते हुए पार्टी ने आखिरकार उनके नाम का एलान कर दिया है। चौथे चरण के लिए हो रहे नामांकन के आखिरी दिन गुरुवार को उन्होंने दावेदारी पेश की। उनके नाम का एलान होने से पार्टी कार्यकर्ताओं व समर्थकों में खुशी की लहर है।
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वर्ष 2009 में यहां से सांसद निर्वाचित होने के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे अखिलेश यादव ने उसके बाद आजमगढ़ और मैनपुरी को अपनी कर्मभूमि बनाया था। वर्ष 2012 से 2017 तक सूबे के मुख्यमंत्री रहने के बाद अखिलेश यादव ने पिछले 2019 के चुनाव में आजमगढ़ से चुनाव लड़कर जीत हासिल की थी। वर्ष 2022 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हाेंने मैनपुरी की करहल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीते। इन दिनों वह वहीं से विधायक हैं। हालांकि विधानसभा चुनाव के बाद से ही वह यहां से लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन बदले हालात में उन्होंने दो दिन पहले ही भतीजे व मैनपुरी के पूर्व सांसद तेज प्रताप के नाम का एलान किया था। लेकिन कार्यकर्ताओं की जिद के आगे उनकी नहीं चली और अब वह फिर से उसी कन्नौज से किस्मत आजमाने पहुंचेंगे, जहां से 24 साल पहले वर्ष 2000 के उपचुनाव से अपनी सियासी पारी का आगाज किया था।

मंगलवार की शाम से लग रही थीं अटकलें, बुधवार को एलान
दरअसल सपा ने दो दिन पहले अखिलेश यादव के भतीजे तेज प्रताप यादव को कन्नौज से उम्मीदवार घोषित किया था। इससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी थी। बात पार्टी आलाकमान तक पहुंची। उसके बाद मंगलवार को मंथन हुआ और उसी समय तय हो गया कि बदलाव होगा। बुधवार को शाम होते-होते अखिलेश के नाम का एलान भी हो गया।

 

नामांकन के दौरान मौजूद रहा कुनबा
अखिलेश यादव के नामांकन के दौरान यादव परिवार और सपा के सभी प्रमुख नेता मौजूद रहे। इसमें अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव, चाचा डॉ. रामगोपाल यादव और शिवपाल यादव भी रहे। तेज प्रताप यादव भी नामांकन के समय मौजूद रहे। जिलाध्यक्ष कलीम खान ने बताया कि पिछले दो दिनों की रिपोर्ट पार्टी प्रमुख तक पहुंचा दी गई थी। उसी आधार पर अब खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ही चुनाव लड़ेंगे। इस एलान से कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ गया है। इस बार पार्टी रिकॉर्ड वोटों से चुनाव जीतेगी।

 

पहले यूपी नहीं छोड़ना चाह रहे थे अखिलेश, फिर बदलना पड़ा फैसला
दो दिन पहले जब तेज प्रताप यादव के नाम का एलान किया गया तो यही समझा गया कि अखिलेश यादव खुद को यूपी की सियासत में ही व्यस्त रखना चाहते हैं। वह चुनाव में उतरने के बजाय पूरे प्रदेश में पार्टी के लिए प्रचार-प्रसार करेंगे। उनके इस फैसले को वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी से भी जोड़कर देखा गया। लेकिन यहां कार्यकर्ताओं से मिले फीडबैक और समर्थकों की मनुहार के बाद आखिरकार उन्हें अपना फैसला बदलना पड़ा। दरअसल पिछले दो साल से अखिलेश यादव के लिए क्षेत्र में जुटे कार्यकर्ता उनके अलावा किसी और के नाम पर तैयार नहीं हो रहे थे। कन्नौज से लेकर लखनऊ तक की दौड़ होती रही। पार्टी के रणनीतिकारों तक संदेश पहुंचाया गया। लगातार मिल रहे फीडबैक के आधार पर पार्टी आलाकमान ने फैसला बदला।

 
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दो दिन ही प्रत्याशी रहे तेज प्रताप
कन्नौज संसदीय सीट के लिए सपा के छठे उम्मीदवार घोषित हुए मैनपुरी के पूर्व सांसद तेज प्रताप यादव सिर्फ दो दिन तक ही अधिकृत उम्मीदवार रहे। गुरुवार को अखिलेश के नामांकन के दौरान वह यहां मौजूद रहेंगे। इसके पहले वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान वह डिंपल यादव के रोड शो में यहां थे। इन दिनों वह मैनपुरी में डिंपल यादव के चुनाव की जिम्मेदारी संभाले हैं। माना यह भी जा रहा है कि उनके नाम को आगे करके अखिलेश यादव ने यहां के कार्यकर्ताओं के मन को टटोला था।
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